फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   PM modi guru give vedanta and upnishad knowledge to world.

PM के गुरु ने दुनिया को दिया वेदांत व उपनिषदों का ज्ञान

Thu, 24 Sep 2015 01:47 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Thu, 24 Sep 2015 01:47 PM IST
विज्ञापन
PM modi guru give vedanta and upnishad knowledge to world.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरु और वेदांत एवं उपनिषदों के मर्मज्ञ स्वामी दयानंद सरस्वती बुधवार रात ब्रह्मलीन हो गए। मंजाकुड़ी तमिननाडु मूल के नटराजन (स्वामी दयानंद) की बाल्यकाल से ही आध्यात्म में गहरी रुचि थी।

विज्ञापन


पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए आजीविका के साधन के तौर पर सबसे पहले धार्मिक पत्रिका में बतौर पत्रकार काम किया। स्वामी दयानंद ने जीवन पर्यंत देश-दुनिया में आध्यात्म के प्रचार और लोगों को इसके लिए प्रेरित करने में बीता।
विज्ञापन

स्वामी दयानंद का जन्म 15 अगस्त, 1930 को मंजाकुडी गांव, तिरुवन्नरु, तमिलनाडु में हुआ।

बचपन में उनका नाम नटराजन था। उनके पिता गोपाल अय्यर और माता बालंबाला थीं। चार भाइयों में सबसे बडे़ नटराजन की प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु के कोडवसाल जिले में हुई। जब वह आठ साल के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया। शिक्षा पूरी करने के बाद जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने एक धार्मिक पत्रिका में पत्रकार के रूप में काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वेदांत और उपनिषद में गहरी रुचि होने के कारण वह साल 1952-53 में स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ गए। इसके बाद उन्हें चिन्मय मिशन में सचिव का दायित्व दिया गया। साल 1955 में नटराजन (स्वामी दयानंद) ने चिन्मयानंद के साथ पांडुलिपि में उत्तरकाशी नामक पुस्तक लिखी। इस दौरान उनकी भेंट चिन्मायनंद के गुरु स्वामी तपोवनम महाराज से हुई।

साल 1956 में वह बंगलूरू चले गए। वहां उन्होंने चमराजपेट के एक संस्कृत कालेज में अध्यापन का कार्य किया। बैराग्य भाव उत्पन्न होने के कारण साल 1961 में स्वामी चिन्मायनंद की अनुमति से उन्होंने संन्यास जीवन धारण कर लिया। स्वामी चिन्मायनंद ने उन्हें संन्यास की दीक्षा दी। इसके बाद उनका नाम दयानंद सरस्वती हो गया।

स्वामी दयानंद नवंबर 1963 में ऋषिकेश आए। यहां वह संन्यास के प्रारंभिक दिनों में घास की झोपड़ी में रहे। करीब तीन साल के प्रवास के दौरान उन्होंने ब्रह्मविद्यापीठ, कैलासाश्रम के स्वामी तारानंदा महाराज से ब्रह्मसूत्र की शिक्षा ली। स्वामी ने साल 1970 से उपनिषदों की शिक्षा का प्रचार प्रसार शुरू किया, जिसे उन्होंने भारत के साथ ही विश्व फलक तक पहुंचाया।

साल 1972 से 1979 तक स्वामी दयानंद ने मुंबई में वेदांत पाठ्यक्रम का आयोजन किया। साल 1979 में अमेरिकी छात्रों के अनुरोध पर स्वामी दयानंद ने कैर्लिफोर्निया में तीन साल वेद और उपनिषद की शिक्षा दी। वह वर्ष 1982 में भारत लौटे  लेकिन यहां वेद और उपनिषदों के प्रचार-प्रसार में जुटे रहे।

73 आध्यात्मिक पुस्तकों का सृजन

PM modi guru give vedanta and upnishad knowledge to world.

स्वामी दयानंद सरस्वती ने लोक के आध्यात्मिक कल्याण के लिए साल 1990 में अरसा विद्या गुरुकुलम पुस्तक से आध्यात्मिक लेखन की शुरुआत की। वर्ष 1955 में नटराजन (स्वामी दयानंद) द्वारा स्वामी चिन्मयानंद के साथ पांडुलिपि में उत्तरकाशी नामक पुस्तक का लेखन किया।

उन्होंने आध्यात्मिक जीवनकाल में अंग्रेजी, हिंदी आदि भाषाओं में करीब 73 पुस्तकें लिखीं। साथ ही स्वामी ने अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, मलेशिया, सिंगापुर और ब्रिटेन में डिवाइन गीता का उपदेश देकर लोगों में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया।

बचपन से निभाई पारिवारिक जिम्मेदारी
ऋषिकेश। स्वामी दयानंद जब आठ साल के थे तभी उनके पिता गोपाल अय्यर का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार में चार भाइयों में सबसे बड़े नटराजन पर शिक्षा के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी भी आ गई। शिक्षा पूरी होने के बाद वह जीविकोपार्जन के लिए चेन्नई चले गए।

जहां उन्होंने एक धार्मिक पत्रिका में बतौर पत्रकार के रूप में काम किया। सूत्रों के मुताबिक वायुसेना में लड़ाकू पायलट बनने की ख्वाहिश के चलते उन्होंने भारतीय वायु सेना ज्वाइन की। लेकिन सेना के कड़े अनुशासन के कारण घुटन महसूस होने पर नौकरी छोड़ दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed