फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   plot fraud in dehradun

आपके प्लाट पर है 'सहारनपुरिया गिरोह' की नजर

Sat, 28 Dec 2013 04:06 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 28 Dec 2013 04:06 PM IST
विज्ञापन
plot fraud in dehradun

जमीन पर कब्जा करने के लिए भूमाफिया नए-नए फंडे अपना रहे हैं। आजादी के पहले के दस्तावेजों में हेराफेरी कर अब जमीन हथियाने की कोशिशें की जा रही हैं। ‘सहारनपुरिया’ गिरोह लोगों को ऐसे पुराने रिकार्ड बेच रहा है।

विज्ञापन


इस फर्जीवाड़े की आड़ में जमीन कब्जाने का नया खेल चल रहा है। ऐसी शिकायतें जिला प्रशासन को भी मिलने लगी हैं।

ये है वजह
जानकार बताते हैं कि पहले देहरादून मेरठ कमिश्नरी में आता था और यह सहारनपुर की तहसील हुआ करती थी। तब सारे रिकार्ड सहारनपुर में ही रखे जाते थे। आजादी के बाद बड़े पैमाने पर घाटी में फसाद हुए, जिसमें बहुत से लोग मारे गए।
विज्ञापन


इस दौरान बहुत से लोग यहां से भाग गए जिनका अब अता-पता नहीं है। देहरादून जिला बना, फिर अलग प्रांत बन गया। लेकिन बहुत से रिकार्ड अब भी सहारनपुर में ही पड़े हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कर्मचारियों की है मिलीभगत
फसाद में जो लोग मरे या भाग गए उनकी जमीनें ग्राम समाज में आ गईं। अब जब दून में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं तो बरसों पुराने ये रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। कर्मचारियों की मिलीभगत से गिरोह ऐसे दस्तावेजों के जरिए मोटी कमाई करने में जुट गया है।

इन्हीं दस्तावेजों से भूमाफिया, नेता, अधिकारियों और कर्मचारियों के गठजोड़ से जमीन पर कब्जे का नया फंडा अपना रहे हैं। लोग सहारनपुर से पुराने रिकार्ड बनवाते हैं और उसी आधार पर यहां जमीनों पर हक जमा लेते हैं।

सूत्रों का कहना है कि जो जमीन ग्राम समाज, नगर निगम और राजस्व विभाग के पास है, उस पर कब्जे में ज्यादा विवाद नहीं होता।

घर छोड़ने का दबाव
सबसे ज्यादा बखेड़ा वहां खड़ा हो रहा है जहां किसी व्यक्ति ने घर बना लिया है और अब उससे जगह छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे कई पीड़ित शिकायती पत्र लेकर नेताओं और अधिकारियों से गुहार लगाते फिर रहे हैं।

डीएम को मिलीं शिकायतें
जमीन पर कब्जे के एक मामले में केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने भी जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। इसके अलावा लोग जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायती पत्र भी दे रहे हैं।


तहसील सूत्रों ने बताया कि बहुत से रिकार्ड सहारनपुर से अभी नहीं आए हैं। इस संबंध में सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) रामजी शरण ने बताया कि पुराने रिकार्ड जहां के होते हैं, वहीं रहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed