उत्तराखंड: नर्सरी एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी, अब घटिया पौधे बेचने पर होगी जेल और लगेगा जुर्माना
- नर्सरी संचालकों को देनी होगी फलदार पौधे के गुणवत्ता की गारंटी
- पौधों के फल न देने पर होगी छह माह की कैद, 50 हजार जुर्माना
- पौध तैयार करने, बिक्री, पैकिंग, पौधशाला प्रबंधन की जांच करेंगे निरीक्षक अधिकारी
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प्रदेश में किसानों को घटिया फलदार पौधे बेच कर धोखाधड़ी करने पर अब नर्सरी संचालकों को जेल जाना पड़ेगा। राज्य के करीब 10 लाख किसानों के हितों को सुरक्षित करने के लिए उत्तराखंड फल पौधशाला विनियमन विधेयक (नर्सरी एक्ट) को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
नर्सरी संचालकों को पौधों की गुणवत्ता की गारंटी देनी होगी। घटिया पौधे बेचने पर संचालक को छह माह की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माना किया जाएगा। इस विधेयक को पारित करने के लिए आगामी सत्र में विधानसभा पटल पर रखा जाएगा।
राज्य में सरकारी और निजी पौधशाला से किसान विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे खरीदते हैं। तीन से चार साल की मेहनत करने के बाद जब पौधा फल देने के लायक होता है। तो कई बार पौधे पर फल ही नहीं लगते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
अब सरकार ने नर्सरी एक्ट बना कर किसानों के हितों को सुरक्षित किया है। किसान जिस नर्सरी से पौधे खरीदेंगे। संचालकों को उसकी उन्नत किस्म व गुणवत्ता की गारंटी देनी होगी। इसके बावजूद भी खरीदे गए पौधों पर फल नहीं लगते हैं तो संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान एक्ट में किया गया है।
हर साल संचालकों को नर्सरी का नवीनीकरण करना होगा। इसके साथ ही पौधों के आयात-निर्यात, नई खोज का पेटेंट, उत्पादन, प्रबंधन समेत तमाम जानकारी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। एक्ट का पालन न करने पर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
बाहरी राज्यों से आने वाले पौधों की भी होगी जांच
बाहरी राज्यों से आपूर्ति होने वाले फलदार पौधे की गुणवत्ता परखने और जांच के लिए एक्ट में प्रावधान नहीं है। प्रदेश की सरकारी और प्राइवेट नर्सरी में तैयार होने वाले पौध के लिए एक्ट में कड़े नियम बनाए गए हैं। सरकार ने उद्यान विभाग को बाहरी राज्यों से आयातित पौधों की गुणवत्ता को लेकर एक्ट प्रावधान करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में संचालित हैं 243 नर्सरियां
प्रदेश में वर्तमान में सरकारी क्षेत्र की 93 व निजी क्षेत्र की 150 से अधिक नर्सरियां है। जहां से किसान हर साल विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे खरीदते हैं। राज्य में सबसे ज्यादा सेब, अखरोट, खुमानी, आड़ू, नाशपाती, अमरूद, अनार की सबसे ज्यादा है। सर्दियों के मौसम में सेब के पौधे लगाए जाते हैं।