फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Plans for the development of sports

राजधानी में खेलों के विकास की योजनाएं हवाई

Wed, 24 Jul 2013 09:57 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Wed, 24 Jul 2013 09:57 AM IST
विज्ञापन
Plans for the development of sports

कभी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम, कभी पवेलियन ग्राउंड का सुंदरीकरण तो कभी परेड ग्राउंड पर बेहतर कोर्ट का निर्माण...। राजधानी में खेलों के विकास के नाम पर खिलाड़ियों को एक के बाद एक बस सपने ही दिखाए जा रहे हैं।

विज्ञापन


सरकार शिलान्यास करती है, सपने दिखाती है लेकिन अफसरों की लापरवाही में ये सपने कभी पूरे न हो सकने वाले बनकर रह जाते हैं। न टर्फ, न बेहतर सुविधाएं और न अच्छा बुनियादी ढांचा। सब सपने भूलकर खिलाड़ियों को फिर गड्ढों और कीचड़ में ही अभ्यास के लिए मजबूर होना पड़ता है।
विज्ञापन


नौ माह बाद भी बस शिलान्यास पट
महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर से लगी जमीन पर 15 नवंबर 2012 को राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की नींव रखी गई। तब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने काम जल्द शुरू कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन नौ माह बाद इस पत्थर से आगे कोई काम यहां नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


खास बात यह है कि स्टेडियम बनाने के लिए ओएनजीसी खेल विभाग को 50 करोड़ रुपये दे चुका है और इस रकम को आगे बढ़ाने का भी भरोसा दिलाया गया था। अब तक स्टेडियम तो बना नहीं, लेकिन इसके नाम पर राज्य के आला अधिकारी नागपुर, जयपुर, सौराष्ट्र, दिल्ली, धर्मशाला, मोहाली, मुंबई की सैर जरूर कर आए।

हर बार इन जगहों पर बने स्टेडियम को देखकर राज्य के स्टेडियम की परिकल्पना बनाने की बात कही गई, लेकिन ये परिकल्पना क्या है यह खुलासा आज तक नहीं हुआ। हैरत यह कि शिलान्यास के दौरान तत्कालीन आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला ने भी यहां आईपीएल मैच कराने की घोषणा कर दी थी, लेकिन अगले पांच साल तक तो ऐसा कुछ होना सपना ही लगता है। नौ माह में यहां निर्माण एजेंसी का केबिन और मजदूरों के कच्चे मकान ही बने हैं। हां इन दिनों नपाई जरूर हो रही है।

ऐसे स्टेडियम का है सपना
दर्शक क्षमता: 25 से 30 हजार
आकार: 143 गुणा 160 मीटर के मैदान में तीन टर्फ विकेट
पवेलियन: एक ग्रांड स्टैंड, ड्रेसिंग रूम और वीआईपी दर्शक दीर्घा
विशेष: अलग पत्रकार दीर्घा, कमेंट्रेटर बॉक्स

अधिकारियों की खींचतान, खिलाड़ी हलकान
शहर के बीचोंबीच बना पवेलियन ग्राउंड दून का ऐतिहासिक फुटबॉल मैदान है, जिसकी नींव आजादी से पूर्व ही पड़ गई थी। 2011 में यहां सुधार कार्यों के लिए इसे बंद किया गया, तो अब तक नहीं खुल सका। खेल विभाग और नगर निगम की लड़ाई में इस मैदान पर खिलाड़ियों के लिए खेलने का सपना पूरा नहीं हो रहा। खेल विभाग नगर निगम के हिस्से के 25 लाख रुपये चुकाने की बात तो कह रहा है, लेकिन अपने हिस्से के 20 लाख रुपये भी उसने अब तक नहीं दिए हैं।

ऐसे में निर्माण एजेंसी मैदान खोलने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, ‘सुंदरीकरण’ के बावजूद पवेलियन की दर्शक दीर्घा खस्ताहाल है। पिछले साल खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने यहां खाली पड़ी जगह पर स्वीमिंग पूल या बास्केटबाल कोर्ट बनाने का प्रस्ताव देने को कहा था, लेकिन अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में खाली पड़ी जमीन अभी बतौर पार्किंग इस्तेमाल कर ली जाती है।


जल्द शुरू कराने की कोशिश
खेल विभाग क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण जल्द शुरू कराने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए खाका भी तैयार हो गया है। दो-ढाई साल में स्टेडियम तैयार हो जाएगा। वहीं पवेलियन ग्राउंड में हुए निर्माण का भुगतान खेल विभाग खुद करेगा। जल्द ही मैदान खिलाड़ियों के लिए खुल जाएगा।
-दिनेश अग्रवाल,खेल मंत्री

खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed