पितृपक्ष 2018: बिना इस एक चीज के सफल नहीं होते श्राद्ध, इन बातों का भी रखें ध्यान
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प्रतिवर्ष आश्विन मास में प्रौष्ठपदी पूर्णिमा से ही श्राद्ध आरंभ हो जाते हैं। इन्हें सोलह श्राद्ध भी कहा जाता है। इस बार श्राद्ध महा पर्व 24 सितंबर से शुरू होकर आठ अक्तूबर तक तक चलेगा। इस दौरान लोग अपने पितरों का पिंडदान करेंगे।
ज्योतिषाचार्य पीयूष भटनागर बताते हैं कि 24 सितंबर से शुरु हो रहे पित्रपक्ष को लेकर पंडितों ने पित्र पक्ष को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। पित्र पक्ष में शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।
आईआईटी स्थित सरस्वती मंदिर के पुजारी पंडित राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि 16 दिनों तक चलने वाले पित्रपक्ष में पित्र पृथ्वी पर आ जाते हैं। पित्रों के निमित्त श्रद्धा पूर्वक किए गए तर्पण और दान को ही श्राद्ध कहा जाता है।
पूजा में इसे जरूर करें शामिल
उन्होंने कहा कि इन दिनों में शुभ कार्य जैसे वाहन खरीदना, नए मकान की बुनियाद डालना, भूमि खरीदना, वैवाहिक कार्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पित्रों का श्राद्ध करने से व्यक्ति तीनों ऋणों से मुक्त हो जाता है।
कुशा की पवित्री(कुश के घास से बनीं अंगूठी) धारण किए बिना तपर्ण कार्य सफल नहीं होते। यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध करने में असमर्थ है तो उसे पित्रों की तिथि के अनुसार गाय को चारा देना चाहिए।
जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी न हो उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। वहीं अकाल मृत्य़ु होने पर भी अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जाता है।