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मददगार: संक्रमित बुजुर्ग को स्ट्रेचर पर रखकर तीन किमी पैदल चले एसडीआरएफ के जवान, अस्पताल में कराया भर्ती

Thu, 27 May 2021 11:51 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुनस्यारी (पिथौरागढ़) Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 27 May 2021 11:51 PM IST
सार

उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों में अभी भी कई जगह सड़कें नहीं है। इस वजह से ग्रामीण मुख्य मार्ग तक पैदल ही सफर करते हैं। लेकिन किसी ग्रामीण के बीमार होने पर गांव तक गाड़ी न पहुंचने के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।

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Pithoragarh news: SDRF jawans walk three km by keeping infected elderly on stretcher, admitted to hospital
एसडीआरएफ के जवानों ने मरीज को पहुंचाया अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एसडीआरएफ के जवानों ने तीन किमी पैदल चलकर तहसील के बुई गांव से कोविड संक्रमित को स्ट्रेचर पर लेटाकर अस्पताल पहुंचाया। बुई गांव में दो कोरोना संक्रमितों को घर में अलग रखा गया था।

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बुई की ग्राम प्रधान लक्ष्मी रलमाल और आशा कार्यकर्ता पानुली गनघरिया ने कोविड प्रबंधन ग्रुप में सूचना डाली कि 76 वर्षीय कोरोना संक्रमित की तबीयत खराब हो गई है, लेकिन पीपीई किट के अभाव में संक्रमित को इलाज के लिए मुनस्यारी नहीं लाया जा सका।
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तीन किमी पैदल यात्रा के बाद लीलम में वाहन की सुविधा उपलब्ध है। यह संदेश देख जिला पंचायत सदस्य मर्तोलिया ने डीएम, एडीएम, एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी को संदेश भेजा।

एसडीएम अभय प्रताप सिंह और नोडल अधिकारी डॉ. चंदोला ने एसडीआरएफ के जवानों को बुई गांव भेजा। पीपीई किट में जवानों ने कोरोना संक्रमित को स्ट्रेचर पर रखकर तीन किमी तक अपने कंधों के सहारे लीलम सड़क तक पहुंचाया, जहां से संक्रमित को कोविड अस्पताल मुनस्यारी में रखा गया है। उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है।

300 किमी सफर कर दून से टिहरी पहुंचाई राहत सामाग्री

कोरोना काल में कुछ लोग ऐसे हैं जो जरूरतमंदों की मदद के लिए दिन रात लगे हुए हैं। इसमें से एक है दून निवासी शैलज मैठानी और उनकी टीम। बुधवार रात को दस बजे उन्हें टिहरी के गेंवाली गांव से एक फोन आया।

फोन करने वाले ने बताया कि गांव दुर्गम में होने के कारण यहां खाने-पीने की मूलभूत सामग्री की दिक्कत हो गई है। लॉकडाउन के कारण पैसों की तंगी भी है। शैलज मैठानी ने बात की तो उसने बताया कि गांव में दस परिवार हैं जिनकी कुल आबादी 60 है। गांव वाले और लोगों से भी मदद मांग चुके हैं, लेकिन दूर होने के कारण अभी तक कोई मदद के लिए नहीं पहुंचा।

जिसके बाद शैलज ने बृहस्पतिवार को सुबह राहत सामग्री एकत्र कर ऋषिकेश से एक टीम गांव के लिए रवाना की। टीम में उज्जवल रस्तोगी, सचिन रयाल, व गुलशन चौहान शामिल थे। टीम ने 300 किलोमीटर का सफर कर दोपहर तक राहत सामग्री गांव तक पहुंचा दी। 

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