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Dehradun News: आठ साल से फिजिशियन का पद खाली, एमओ के भरोसे ओपीडी
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गंभीर मरीजों की बीमारी के निदान और उपचार के आती है समस्या
उप जिला अस्पताल में आठ साल से फिजिशियन की तैनाती नहीं हो पाई है। लंबे समय से सामान्य चिकित्सा की ओपीडी मेडिकल ऑफिसर के भरोसे ही चल रही है।
उप जिला अस्पताल में रोजाना उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या 400 से 500 के बीच रहती है। इनमें करीब 50 फीसदी मरीज सामान्य चिकित्सा ओपीडी में दिखाने आते हैं। अस्पताल में आठ साल से फिजिशियन का पद रिक्त पड़ा है। लंबे समय से अस्पताल के वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर ही ओपीडी में मरीजों को देख रहे है।
अस्पताल में हृदय, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, सीओपीडी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, ब्रोन्किइक्टेसिस, टीबी, थायराइड, कैंसर आदि के मरीज आते है। उप जिला अस्पतालों में सुपर विशेषज्ञ का पद नहीं होता है। ऐसे में हृदय, छाती, हारमोंस आदि से संबंधित रोगों में फिजिशियन से लाभकारी उपचार मिल जाता है। वहीं अपनी शिक्षा और अनुभव के आधार पर फिजिशियन गंभीर बीमारियों का समय पर सही निदान कर पाते हैं।
वहीं दैनिक ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 200 होने के चलते वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर पर भी दबाव रहता है। वहीं मरीजों को भी पर्चा लिखवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। अगर चिकित्सक जांच लिखते हैं तो उसके सैंपल देने के बाद मरीज को रिपोर्ट के लिए अगले दिन आना पड़ता है।
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दूसरे जनपद से भी आते हैं मरीज
उप जिला अस्पताल में जौनसार बावर, सीमांत उत्तरकाशी और टिहरी क्षेत्र से भी मरीज आते हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के सीमांत क्षेत्र से मरीज उपजिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचते है। लंबे इंतजार और समय बर्बाद होने के चलते मरीजों को परेशानी होती है।
फिजिशियन की तैनाती के लिए मुख्यालय को लगातार डिमांड भेजी जा रही है। पूरे प्रदेश में ही फिजिशियन और सर्जन की कमी है। यू कोट वी पे के तहत भी चिकित्सकों की नियुक्ति हो रही है। उम्मीद है कि योजना के तहत अस्पताल को भी फिजिशियन मिल जाएगा। - डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पताल, विकासनगर
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उप जिला अस्पताल में आठ साल से फिजिशियन की तैनाती नहीं हो पाई है। लंबे समय से सामान्य चिकित्सा की ओपीडी मेडिकल ऑफिसर के भरोसे ही चल रही है।
उप जिला अस्पताल में रोजाना उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या 400 से 500 के बीच रहती है। इनमें करीब 50 फीसदी मरीज सामान्य चिकित्सा ओपीडी में दिखाने आते हैं। अस्पताल में आठ साल से फिजिशियन का पद रिक्त पड़ा है। लंबे समय से अस्पताल के वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर ही ओपीडी में मरीजों को देख रहे है।
अस्पताल में हृदय, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, सीओपीडी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, ब्रोन्किइक्टेसिस, टीबी, थायराइड, कैंसर आदि के मरीज आते है। उप जिला अस्पतालों में सुपर विशेषज्ञ का पद नहीं होता है। ऐसे में हृदय, छाती, हारमोंस आदि से संबंधित रोगों में फिजिशियन से लाभकारी उपचार मिल जाता है। वहीं अपनी शिक्षा और अनुभव के आधार पर फिजिशियन गंभीर बीमारियों का समय पर सही निदान कर पाते हैं।
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वहीं दैनिक ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 200 होने के चलते वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर पर भी दबाव रहता है। वहीं मरीजों को भी पर्चा लिखवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। अगर चिकित्सक जांच लिखते हैं तो उसके सैंपल देने के बाद मरीज को रिपोर्ट के लिए अगले दिन आना पड़ता है।
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दूसरे जनपद से भी आते हैं मरीज
उप जिला अस्पताल में जौनसार बावर, सीमांत उत्तरकाशी और टिहरी क्षेत्र से भी मरीज आते हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के सीमांत क्षेत्र से मरीज उपजिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचते है। लंबे इंतजार और समय बर्बाद होने के चलते मरीजों को परेशानी होती है।
फिजिशियन की तैनाती के लिए मुख्यालय को लगातार डिमांड भेजी जा रही है। पूरे प्रदेश में ही फिजिशियन और सर्जन की कमी है। यू कोट वी पे के तहत भी चिकित्सकों की नियुक्ति हो रही है। उम्मीद है कि योजना के तहत अस्पताल को भी फिजिशियन मिल जाएगा। - डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पताल, विकासनगर