हाईकोर्ट में दाखिल की गई उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए याचिका, ये है पूरा मामला
नैनीताल हाईकोर्ट में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए याचिका दाखिल की गई है। जिसे हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है। हरिद्वार निवासी नईम अहमद ने कोर्ट में राज्य में पंचायतों के चुनाव न कराए जाने को संवैधानिक संकट बताते हुए जनहित याचिका दायर की है।
प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने सरकार को शुक्रवार तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
पंचायतों का कार्यकाल 15 जुलाई को खत्म हो गया है
इस दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 2010 की चुनाव से जुड़ी एक जनहित याचिका पर तत्कालीन मुख्य सचिव ने कोर्ट में शपथपत्र दिया था कि भविष्य में पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर कराए जाएंगे और प्रशासकों की नियुक्ति नहीं की जाएगी।
कोर्ट ने इस पर सरकार से पूछा है कि पूर्व के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। बता दें प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 15 जुलाई को खत्म हो गया है और राज्य सरकार की अधिसूचना पर पंचायतों का काम प्रशासक संभाल रहे हैं।
यह थी याचिका
पूर्व ग्राम प्रधान गुलरभोज ऊधमसिंह नगर निवासी नईम अहमद ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने अभी तक पंचायत चुनाव का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है और प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं।
याचिका में कहा गया कि संवैधानिक प्रावधान यह है कि पुरानी कमेटी का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नई कमेटी गठिन हो जानी चाहिए। याचिकाकर्ता का मांग की थी कि पुराने आदेश का पालन नहीं करने पर सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। धारा 356 के तहत सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।