नौसेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिलाने में उत्तराखंड की सुमिता का रहा अहम योगदान
- हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वालों में शामिल थीं उत्तराखंड सुमिता बलूनी
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नौसेना में महिला अफसरों को भी स्थायी कमीशन दिए जाने की सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत दे दी है। इसमें उत्तराखंड की प्रथम महिला अफसर सुमिता बलूनी का भी अहम योगदान रहा है। जिन पांच अधिकारियों ने कमीशन के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, उसमें उत्तराखंड की सुमिता भी शामिल थीं।
महिला अफसर सुमिता बलूनी ने ग्रेजुएशन के बाद अगस्त 1993 में नेवी ज्वाइन की थी। इसी दौरान उनके भाई कैप्टन आशीष बलूनी भी नेवी में बतौर अफसर शामिल हुए थे। मूल रूप से कोटद्वार के कंडलसेरा के रहने वाली कमांडर सुमिता बलूनी और कै प्टन आशीष बलूनी उत्तराखंड के नेवी में अफसर बनने वाले पहले भाई-बहन थे।
उनके पिता दिनेश चंद्र बलूनी डीआरडीओ में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत थे। 14 साल की सेवा के बाद कमांडर सुमिता बलूनी 2007 में रिटायर्डमेंट दे दिया था। उस समय उन्होंने उन्हें कमीशन दिए जाने की मांग की थी, लेकिन उन्हें नहीं दिया गया, जबकि उनके साथी पुरुष अफसर को कमीशन दे दिया गया था।
इसके बाद अन्य महिला अफसरों के साथ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2012 में महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन देने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद नौ सेना सुप्रीम कोर्ट चली गई।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी थल सेना की भांति नौ सेना में भी महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन देने की इजाजत दे दी है। क मांडर सुमिता बलूनी के भाई आशीष बलूनी ने कहा कि इस फैसले के बाद उनकी बहन काफी खुश हैं। इस निर्णय को उन्होंने ऐतिहासिक बताया है। यह सभी महिला अफसरों की जीत है। इस निर्णय के बाद अब रिटायर्ड महिला अफसरों को पेंशन की सुविधा भी मिलने लगेगी।