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होटल इंडस्ट्री में शुरू होगा छंटनी का दौर
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 23 Sep 2013 12:13 PM IST
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मंदी की मार झेल रही हरिद्वार की होटल इंडस्ट्री में छंटनी का दौर शुरू हो गया है। काम न होने के कारण कर्मचारियों का वेतन कम किया जा रहा है या फिर उन्हें निकाला जा रहा है।
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बड़े होटल कारोबारी तो घर से कर्मचारियों की तनख्वाह और अन्य खर्च वहन कर रहे हैं, लेकिन छोटे होटल व्यवसायियों की हालत खराब हो चुकी है।
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सीजन होने के बावजूद नए लोगों को काम नहीं मिल रहा है। यही हाल रहा तो जल्द ही बड़े पैमाने पर होटल कारोबारी छंटनी कर सकते हैं। हरिद्वार में करीब 300 होटल हैं। इनमें से 20 प्रतिशत तो पिछले तीन-चार सालों में ही वजूद में आए हैं। टूरिस्ट न होने के कारण होटलों का खर्चा भी निकलना कठिन हो गया है।
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तनख्वाह के भी लाले
बिजली का बिल और कर्मचारियों की तनख्वाह के भी लाले पड़ गए हैं। हरिद्वार की होटल इंडस्ट्री से करीब ढाई हजार लोग रोजगार से जुड़े हैं। इनमें से अधिकतर पहाड़ी क्षेत्रों से आते हैं। काम न होने के चलते कुछ होटल कारोबारियों ने छंटनी शुरू कर दी है। कुछ ने अपने कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया है।
यही नहीं कुछ होटल कारोबारियों ने वेतन में भी कटौती कर दी है। बदतर हालत को देखते हुए होटल कर्मचारी काम के लिए दूसरे प्रदेशों का रुख कर रहे हैं। यही नहीं सीजन के दौरान करीब एक से डेढ़ हजार अतिरिक्त लोगों को रोजगार मिलता था, लेकिन इस बार वह भी आपदा में छिन गया।
बंगाली सीजन से आशा
हरिद्वार के होटल व्यवसायी बंगाली सीजन से आस लगाए बैठे है। अगले माह से हरिद्वार में बंगाली सीजन शुरु हो जाएगा। इससे यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। बंगाली सीजन अच्छा रहा तो होटल इंडस्ट्री को उबरने में मदद मिलेगी।
छूट ने भी नहीं किया काम
होटल इंडस्ट्री ने यात्रियों को लुभाने के लिए छूट देना शुरु कर दिया है। किराए में तीस प्रतिशत तक छूट दी जा रही है। इसके अलावा फूडिंग चार्ज भी कम कर दिए गए हैं। बावजूद इसके यात्रियों का टोटा बना हुआ है।
अगस्त-सितम्बर में होटल गंगा एज्योर देशी और विदेशी टूरिस्ट से गुलजार रहता था। लेकिन, पिछले सालों के मुकाबले टूरिस्ट की संख्या दस प्रतिशत ही रह गई है। हालात यह है कि बिजली का बिल और कर्मचारियों का खर्चा जेब से देना पड़ रहा है। होटल के प्रबंधक सीएम शर्मा ने बताया कि होटल व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है। दस प्रतिशत ही काम रह गया है।
देवपुरा स्थित होटल रिओ के कमरे भी पिछले पंद्रह दिनों से खाली पड़े हैं। पहाड़ में आई आपदा के बाद से इक्का-दुक्का ही अतिथि आ पा रहे हैं। होटल के एमडी संजय वर्मा ने बताया कि होटल चलाना मुश्किल होता जा रहा है। बिजली का भी खर्चा नहीं निकल पा रहा है। सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए। लेकिन, अफसोस ऐसा नहीं हो रहा है।
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