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Chamoli: अचानक ट्रॉली बंद, ढाई घंटे तक हवा में फंसे रहे तीन लोग, लोनिवि कर्मियों ने रस्सियों के सहारे निकाला

Tue, 23 Jul 2024 10:28 AM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, देवाल (चमोली)।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवाल (चमोली)। Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 23 Jul 2024 10:28 AM IST
सार

वर्ष 2013 में आई बाढ़ में नदी पर बना पुल बहने के बाद यहां आवागमन के लिए ट्रॉली लगाई गई थी। शुरुआत के तीन साल तक ट्रॉली में लोगों के आने जाने के लिए दो केविन थे, लेकिन बाद में एक केविन को हटा लिया गया।

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People trapped in hydraulic trolley in Dewal Chamoli karanprayag Uttarakhand News in hindi
ट्रॉली में फंसे लोग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पिंडर नदी पर लगी ट्राॅली अचानक खराब होने से तीन लोग ढाई घंटे तक फंसे रहे। ग्रामीणों की सूचना पर सुबह करीब साढ़े 10 बजे लोनिवि के कर्मियों ने रस्सी से ट्राॅली को खींचकर लोगों को निकाला।

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मंगलवार सुबह आठ बजे ओडर गांव के सुनील, वीरेंद्र सिंह व सुंदर सिंह देवाल आने के लिए ट्रॉली में बैठे थे।

लगभग 70 मीटर चलने के बाद ट्रॉली अचानक रुक गई और बीच में ही फंस गए। ट्रॉली में फंसे लोगों ने सूचना बीडीसी पान सिंह को दी। पान सिंह ने तत्काल लोनिवि को जानकारी दी। इसके बाद लोनिवि के कर्मी और मैकेनिकल इंजीनियर मौके पर पहुंचे और ढाई घंटे बाद रस्सी के सहारे ट्रॉली को खींचकर तीनों को सुरक्षित निकाला।
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ग्रामीणों ने विभाग की लापरवाही बताया। बीडीसी पान सिंह ने बताया, विभाग द्वारा समय पर ट्रॉली की सर्विस नहीं की जाती। वर्ष 2013 में आई बाढ़ में नदी पर बना पुल बहने के बाद यहां आवागमन के लिए ट्रॉली लगाई गई थी। शुरुआत के तीन साल तक ट्रॉली में लोगों के आने जाने के लिए दो केविन थे, लेकिन बाद में एक केविन को हटा लिया गया।
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मैकेनिकल इंजीनियर नंदलाल भारती ने बताया, ट्रॉली की पुली और बैरिंग पुरानी हो चुकी थी, जिसके चलते ट्रॉली में दिक्कत आई। उधर, 2013 की आपदा में ओडर का झूलापुल बह गया था। पुल से ओडर, सिलंगी, थलिया पातल, कुमाऊं के दाबु आदि गांवों के लोगों का आना-जाना होता था। पुल बहने के बाद लोनिवि ने हाइड्रोलिक ट्राॅली लगाई। इस ट्रॉली से बरसात के छह माह आवागमन होता है।



 

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