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लोगों ने चखा झंगोरे का भात, ढबड़ी रोटी का स्वाद
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फूड फेस्टिवल में पहाड़ी व्यजंनों का आंनद लेते लोग। संवाद
- फोटो : DEHRADUN
उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक संस्था धाद की ओर से कल्यो फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया। स्मृतिवन, मालदेवता में आयोजित फेस्टिवल में लोगों ने झंगोरे का भात, ढबड़ी रोटी, चैंसु, रैठूं यानी कद्दू का रायता, लिंगडे़ और तिमला के अचार के अलावा लाल चावल की खीर का स्वाद चखा। फेस्टिवल में लोक गायिका रेखा उनियाल ने सुंदर गीतों की प्रस्तुति दी।
सचिव तन्मय ने बताया कि फेस्टिवल पहाड़ के अन्न उत्पादन के पक्ष में की गयी पहल ‘फंची’ का ही हिस्सा है। इसमें हम पहाड़ के अन्न को अपने नियमित भोजन में शामिल करने की अपील कर रहे हैं। कल्यो की संयोजक और पहाड़ी भोजन की विशेषज्ञ मन्जू काला ने बताया कि उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन यहां मौजूद सुदूरवर्ती पहाड़ी इलाकों की संस्कृति और समाज के खान पान को दर्शाते हैं। पहाड़ में लोगों ने अपनी भौगोलिक स्थिति व आवश्यकता के अनुसार कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन इजाद किए हैं। इनमें दाल-भात, रैलु, छंछेडा़, काफली, फाणु, झ्वली (कढ़ी), चैंसु, खाजा, बाड़ी, पल्यो, कोदे (मंडुवा) व मुंगरी (मक्का) की रोटी, आलू का थिंचोंणी, आलू का झोल, झंगोरे का भात, अरसा, बाल मिठाई, भांग की चटनी, भट का चुलकाणि, डुबुक, गहत (कुलथ) का गथ्वाणि, गहत की भरवा रोटी, गुलगुला, झंगोरे की खीर, चौलाई का तसमे, ग्वीरल , तैडु़, गींठी की सब्जी, बिरूडे़ स्वाला, तिल की चटनी, उड़द की पकोड़ी आदि प्रमुख हैं।
इस मौके पर एसजीआरआर स्नातकोत्तर के प्राचार्य विनय मोहन बौड़ाई, फंची के संयोजक किशन सिंह, शांति बिंजोला, टीएस असवाल, देवेंद्र कांडपाल, साकेत रावत, बृज मोहन उनियाल, विनोद कुमार, अर्चना ग्वाड़ी, नीलम, प्रभा वर्मा मौजूद रहे।
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सचिव तन्मय ने बताया कि फेस्टिवल पहाड़ के अन्न उत्पादन के पक्ष में की गयी पहल ‘फंची’ का ही हिस्सा है। इसमें हम पहाड़ के अन्न को अपने नियमित भोजन में शामिल करने की अपील कर रहे हैं। कल्यो की संयोजक और पहाड़ी भोजन की विशेषज्ञ मन्जू काला ने बताया कि उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन यहां मौजूद सुदूरवर्ती पहाड़ी इलाकों की संस्कृति और समाज के खान पान को दर्शाते हैं। पहाड़ में लोगों ने अपनी भौगोलिक स्थिति व आवश्यकता के अनुसार कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन इजाद किए हैं। इनमें दाल-भात, रैलु, छंछेडा़, काफली, फाणु, झ्वली (कढ़ी), चैंसु, खाजा, बाड़ी, पल्यो, कोदे (मंडुवा) व मुंगरी (मक्का) की रोटी, आलू का थिंचोंणी, आलू का झोल, झंगोरे का भात, अरसा, बाल मिठाई, भांग की चटनी, भट का चुलकाणि, डुबुक, गहत (कुलथ) का गथ्वाणि, गहत की भरवा रोटी, गुलगुला, झंगोरे की खीर, चौलाई का तसमे, ग्वीरल , तैडु़, गींठी की सब्जी, बिरूडे़ स्वाला, तिल की चटनी, उड़द की पकोड़ी आदि प्रमुख हैं।
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इस मौके पर एसजीआरआर स्नातकोत्तर के प्राचार्य विनय मोहन बौड़ाई, फंची के संयोजक किशन सिंह, शांति बिंजोला, टीएस असवाल, देवेंद्र कांडपाल, साकेत रावत, बृज मोहन उनियाल, विनोद कुमार, अर्चना ग्वाड़ी, नीलम, प्रभा वर्मा मौजूद रहे।
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