फूलों की घाटी आएं तो जरा संभलकर, नहीं तो उठानी होगी ये परेशानी
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इस वर्ष विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी तक जाने के लिए पर्यटकों की राह आसान नहीं होगी। घाटी तक जाने वाले पैदल ट्रेक पर घूसाधार में विशाल हिमखंड पसरा हुआ है।
फूलों की घाटी के निरीक्षण के लिए गई नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की टीम हिमखंड के चलते घाटी तक नहीं पहुंच पाई है और शुक्रवार को बैरंग लौट आई है। एक जून को फूलों की घाटी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए खुल जाएगी।
जिसे देखते हुए बीती 18 अप्रैल को नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन दरोगा कुंदी लाल आर्य के नेतृत्व में वन कर्मी मनमोहन भंडारी, जय प्रकाश, दर्शन सिंह बत्र्वाल, दौलत सिंह और मनोरी लाल घाटी के निरीक्षण पर गए थे, लेकिन घूसाधार में आए विशाल हिमखंड से पार्क प्रशासन की टीम घाटी तक नहीं जा पा रही है।
बर्फबारी से घाटी को कितना नुकसान हुआ है, राष्ट्रीय पार्क की टीम इसका आकलन भी नहीं कर पा रही है। राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी का कहना है कि फूलों की घाटी को खुलने में अभी काफी वक्त है।
घाटी में बनी वर्ष 2013 जैसी स्थिति
हिमखंड पिघल जाएगा। यदि मई माह के मध्य तक भी हिमखंड नहीं पिघला तो घाटी तक आवाजाही के लिए बर्फ काटकर रास्ता बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष घाटी में प्रवेश के लिए ऑन लाइन बुकिंग की जा रही है। जिससे अधिक सैलानियों के उमडने की उम्मीद है।
फूलों की घाटी में वर्ष 2013 में भारी बर्फबारी के कारण पुष्पावती नदी पर निर्मित पैदल पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। पैदल ट्रेक भी करीब एक किलोमीटर तक बर्फ से ढक गया था।
करीब दो किमी ट्रेट क्षतिग्रस्त हो गया था। जिससे पार्क प्रशासन को घाटी पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद करनी पड़ी थी। वर्ष 2014 से वर्ष 2016 तक बर्फबारी कम होने से घाटी में आवाजाही सामान्य रही।