{"_id":"5a9a97d04f1c1bbb218b5cbf","slug":"people-angry-on-tehsildar-in-haridwar-uttarakhand","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चुटकी बजाने पर यहां लोगों को आया इतना गुस्सा कि बुरी तरह फंस गए तहसीलदार, जानिए वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुटकी बजाने पर यहां लोगों को आया इतना गुस्सा कि बुरी तरह फंस गए तहसीलदार, जानिए वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sat, 03 Mar 2018 06:14 PM IST
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हड़ताल
- फोटो : demo
तहसीलदार के चुटकी बजाने पर यहां लोगों को इतना गुस्सा आ गया कि वह बुरी तरह फंस गए। जानिए आखिर चुटकी को लेकर क्यों हुआ इतना हंगामा..
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सत्यापन के लिए आई तहसीलदार को बैनामा लेखकों, स्टांप विक्रेता, टाइपिस्टों आदि के विरोध का सामना करना पड़ा। बैनामा लेखकों- अधिवक्ताओं ने तहसीलदार से मिलकर प्रक्रिया समझाई, लेकिन उनके चुटकी बजाकर शांत रहने को कहने पर बैनामा लेखक भड़क गए। बैनामा लेखकों ने अपने चैंबरों के शटर बंद करते हुए हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने तहसीलदार के तबादले की मांग उठाई है।
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शनिवार को तहसीलदार सुनैना राणा ने नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपालों के साथ परिसर में बने चैंबरों में काम कर रहे बैनामा लेखक, स्टांप विक्रेता, टाइपिस्टों का सत्यापन करना शुरू किया। तहसीलदार ने सबसे पहले बैनामा लेखक संजय गुप्ता का लाइसेंस देखा और चैंबर नंबर मांगा।
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लाइसेंस में चैंबर नंबर अंकित नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। इसके बाद अन्य लेखकों एवं स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस भी देखे। इस दौरान एक टाइपिस्ट से भी लाइसेंस दिखाने को कहा, लेकिन उसके पास लाइसेंस नहीं होने पर मामला बिगड़ गया।
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तहसीलदार भड़कीं और बजाई चुटकी..
हड़ताल
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदेश जैन के नेतृत्व में बैनामा लेखक, स्टांप विक्रेता, टाइपिस्ट तहसीलदार से मिले और सत्यापन का अधिकार तहसीलदार के दायरे से बाहर बताया। आदेश जैन ने टाइपिस्टों को बैनामा लेखकों के अधीन में बताया। तहसीलदार के उनकी बात न सुनने पर बैनामा लेखकों ने कहा कि लेखपाल एवं कानूनगो ने अनाधिकृत तरीके से दो-दो युवक रखे हुए और वह रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत लेते हैं। इतना सुनते ही तहसीलदार भड़क उठीं और चुटकी बजाकर उन्हें शांत रहने को कहा।
तहसीलदार के चुटकी बजाने को बैनामा लेखकों ने अपना अपमान माना और उनकी तहसीलदार से नोकझोंक हो गई। तहसीलदार के कार्यालय से निकलते ही बैनामा लेखक और अधिवक्ताओं ने अपने चैंबर बंद करते हुए काम ठप कर दिया। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदेश जैन ने कहा कि सत्यापन के नाम पर उनका शोषण किया जाता है। वह जितने भी काम करते हैं उनका शपथ पत्र दिया जाता है। इस दौरान सलभ मित्तल, सुभाष चौधरी, कुलदीप सिंह, पहल सिंह वर्मा, नवनीत जायसवाल, नवनीत चौहान, संदीप धीमान, मोद भानू आदि शामिल हुए।
हड़ताल से काम हुए ठप
तहसीलदार के साथ वार्ता नहीं होने पर बैनामा लेखक, अधिवक्ताओं के साथ-साथ टाइपिस्ट, स्टांप विक्रेताओं ने काम ठप कर दिया। इससे तहसील में दोपहर करीब साढ़े बारह बजे से काम ठप हो गया। ऐसे में तहसील में काम कराने आए लोगों को निराश लौटना पड़ा। तहसील परिसर में काम करने के लिए अनुमति लेनी होती है। ऐसे में सत्यापन करना जरूरी है। बिना सत्यापन के काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए सत्यापन अभियान चलाया गया। यदि कोई फर्जी काम होता है उसकी जवाबदेही तहसीलदार के साथ अन्य सरकारी कर्मचारियों की होती है, न कि बैनामा लेखकों की। ऐसे में यदि कोई विरोध करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सुनैना राणा, तहसीलदार।
तहसीलदार के चुटकी बजाने को बैनामा लेखकों ने अपना अपमान माना और उनकी तहसीलदार से नोकझोंक हो गई। तहसीलदार के कार्यालय से निकलते ही बैनामा लेखक और अधिवक्ताओं ने अपने चैंबर बंद करते हुए काम ठप कर दिया। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदेश जैन ने कहा कि सत्यापन के नाम पर उनका शोषण किया जाता है। वह जितने भी काम करते हैं उनका शपथ पत्र दिया जाता है। इस दौरान सलभ मित्तल, सुभाष चौधरी, कुलदीप सिंह, पहल सिंह वर्मा, नवनीत जायसवाल, नवनीत चौहान, संदीप धीमान, मोद भानू आदि शामिल हुए।
हड़ताल से काम हुए ठप
तहसीलदार के साथ वार्ता नहीं होने पर बैनामा लेखक, अधिवक्ताओं के साथ-साथ टाइपिस्ट, स्टांप विक्रेताओं ने काम ठप कर दिया। इससे तहसील में दोपहर करीब साढ़े बारह बजे से काम ठप हो गया। ऐसे में तहसील में काम कराने आए लोगों को निराश लौटना पड़ा। तहसील परिसर में काम करने के लिए अनुमति लेनी होती है। ऐसे में सत्यापन करना जरूरी है। बिना सत्यापन के काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए सत्यापन अभियान चलाया गया। यदि कोई फर्जी काम होता है उसकी जवाबदेही तहसीलदार के साथ अन्य सरकारी कर्मचारियों की होती है, न कि बैनामा लेखकों की। ऐसे में यदि कोई विरोध करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सुनैना राणा, तहसीलदार।