चेक बाउंस होने पर अदालत ने सुनाया ऐसा फैसला कि गलती करने वाले अब सौ बार सोचेंगे
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चेक बाउंस होने पर यहां अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया कि अब ऐसा करना आपको भारी पड़ सकता है। ढाई लाख रुपये का चेक बाउंस होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग ने जसपुर निवासी शब्बीर अहमद को एनआई एक्ट का दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास और 2.60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जसपुर गांधी पार्क निवासी नरेंद्र कुमार वर्मा की ओर से अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने काशीपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग की अदालत में परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया कि पारिवारिक संबंधों के चलते जसपुर निवासी शफीक आढ़ती ने मई 2013 में परिवादी नरेंद्र से ढाई लाख रुपये की राशि उधार ली थी।
तकादा करने पर डेढ़ वर्ष बाद शब्बीर ने ढाई लाख रुपये की राशि का एक चेक नरेंद्र को दिया। चेक संख्या 296167 पर भुगतान की तिथि 19 फरवरी अंकित थी। परिवादी ने उक्त चेक भुगतान के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की जसपुर शाखा में प्रस्तुत किया।
परंतु उक्त खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। सुनवाई के दौरान परिवादी व प्रतिवादी की ओर से दलीलें पेश कर साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दलीलों को सुनने व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग अखिलेश कुमार पांडेय ने परिवादी के दावे को सही माना।
अदालत ने प्रतिवादी शब्बीर को एनआई एक्ट का दोषी मानते हुए उसे एक वर्ष के कारावास व 2.60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माने की राशि से 2.55 लाख रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में अदा करने तथा शेष पांच हजार रुपये की राशि राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं।