फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   patients suffer from pharmacist strike

उत्तराखंड में मरीजों से रूठ गए 'भगवान'

Tue, 12 Nov 2013 08:30 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 12 Nov 2013 08:30 AM IST
विज्ञापन
patients suffer from pharmacist strike

उत्तराखंड में पहाड़ों पर डॉक्टर तो हैं नहीं, जिन फार्मेसिस्टों के भरोसे लोगों का स्वास्थ्य है अब वे भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में पहाड़ हो या मैदान लोगों की सेहत का अब कोई रखवाला नहीं है।

विज्ञापन


पढ़ें, एक साल तक टिहरी बांध की झील में चलेंगी 'मुफ्त' बोट
विज्ञापन


अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति यह है कि मरीजों को दवा देने वाला तक कोई नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को हो रही है जो अस्पताल की दवाओं पर निर्भर हैं। उन्हें बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाजार से मंगानी पड़ी दवा
इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग को भी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए बाजार से दवाएं मंगानी पड़ रही हैं। वहीं लैब टेक्नीशियन की हड़ताल से मरीज जरूरी जांच से महरूम हैं। प्रदेश भर में डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने सोमवार को वेतन विसंगति दूर करने, प्रोन्नति के पद सृजित करने, दुर्गम भत्ता सहित 21 सूत्री मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया।

पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनके आंदोलन की वजह से सरकारी अस्पतालों में दवा वितरण, आकस्मिक सेवा और पैथोलॉजी सेवाएं ठप हो गई हैं। जिससे गढ़वाल के नई टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर जिलों में हालात बेकाबू हो गए हैं।

पढ़ें, मॉर्निंग वॉक पर मिले हाथी तो उसे न कहें 'गुड मॉर्निंग'

सरकारी अस्पतालों में न मरीजों को दवाई मिली और न ही इंजेक्शन लगे। कुमाऊं के लगभग सभी अस्पताल और उपकेंद्र ठप हो गए, जबकि हरिद्वार और रुड़की में मरीज और तीमारदार बेहाल भटकते रहे। देहरादून में तमाम दावों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाया और मरीज दवा के लिए मारे-मारे फिरते रहे।

फार्मेसिस्ट के लिए आज जारी हो सकता है जीओ

फार्मेसिस्टों और लैब तकनीशियनों की हड़ताल खत्म कराने को सोमवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने दखल दिया। उन्होंने शासन और विभागीय अधिकारियों से कर्मचारियों की मांगों के संबंध में जानकारी ली और तुरंत समाधान के निर्देश दिए।

इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री, शासन और महानिदेशालय स्तर पर बैठकें हुईं और देर रात तक फार्र्मेसिस्ट एसोसिएशन और महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. जीएस जोशी के बीच वार्ता चली। एसोसिएशन की मौजूदगी में डीजी कार्यालय ने रात दस बजे उनकी मुख्य मांगों से संबंधित ढांचा पुनर्गठन, रिवाइज पे स्केल जैसे प्रस्ताव तैयार किए।

इसके बाद एसोसिएशन ने आश्वासन दिया कि मंगलवार को हड़ताल वापस ले ली जाएगी, बशर्ते शासन प्रस्तावों पर जल्द कार्रवाई करे। मंगलवार को शासन फार्मेसिस्टों की कुछ प्रमुख मांगों के शासनादेश जारी कर देगा। वहीं लैब तकनीशियनों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का शासनादेश जारी भी कर दिया गया।

फार्मेसिस्टों की बेमियादी हड़ताल से प्रदेश में त्राहि-त्राहि मचने पर चिंतित स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री से वार्ता की, जिसके बाद सीएम ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, अपर सचिव स्वास्थ्य और डीजी हेल्थ को बुलाया। बैठक में शासन ने मुख्यमंत्री के समक्ष मांगों को पूरा करने की स्थिति से अवगत करवाया।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को मानने और तुरंत हड़ताल खत्म कराने के निर्देश दिए। इसके बाद लैब तकनीशियन एसोसिएशन से बात कर उनकी प्रोत्साहन भत्ते की मांग पूरी कर दी गई। अब स्वास्थ्य शिविरों में नर्सों सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तर्ज पर लैब तकनीशियनों को 15 रुपए प्रति केस प्रोत्साहन भत्ता मिलेगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने ग्रेड पे बढ़ाने और ढांचा पुनर्गठित करने की मांग को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद फार्मेसिस्ट एसोसिएशन से बात शुरू की गई जो देर रात तक सहमति पर खत्म हुई।


काफी रुपए हो रहे खर्च
चमोली जिले के लांजी गांव की माहेश्वरी का कहना है कि पांव में सूजन होने से वह इलाज के लिए शनिवार को जिला अस्पताल आई थी। सोमवार को डॉक्टर ने उन्हें खून की जांच के लिए कहा। अस्पताल में पैथोलॉजी जांच नहीं होने के कारण उन्हें प्राइवेट में जांच करानी पड़ी।

जोशीमठ निवासी खीम सिंह पेट दर्द के कारण अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने उन्हें भर्ती कर दिया है। जो दवाई लिखी वह अस्पताल में नहीं मिली। आखिरकार उन्हें मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इसमें काफी पैसा खर्च हो रहा है।

नगला खुर्द निवासी इरशाद काफी परेशान हैं। उनको तीन दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। उन्होंने बताया कि एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाने को तीन दिनों से चक्कर काट रहा हूं, कोई सुनने वाला नहीं है। इतना पैसा है नहीं कि बाहर इलाज करा सकूं, अब मैं क्या करूं।

फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए क्लिक करें---

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed