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Dehradun News: घर का खर्च और अच्छे खाने का लालच देकर बच्चों से बालश्रम करवाते हैं माता-पिता

Fri, 15 Mar 2024 01:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 15 Mar 2024 01:45 AM IST
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Parents force their children to do child labor by luring
कुछ माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाना तो दूर, उनसे बालश्रम तक करवाते हैं। इसके अलावा कई भीख भी मंगवाते हैं। पिछले एक सप्ताह में जिला टास्क फोर्स और बचपन बचाओ संस्था की ओर से चार बाल भिक्षावृत्ति और पांच बालश्रम करने वाले बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। 18 साल से कम उम्र के इन सभी बच्चों में बालश्रम वाले चार लड़के, बाल भिक्षावृत्ति वालों में दो लड़कियां और दो लड़के शामिल हैं।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशानुसार जिला टास्क फोर्स और बचपन बचाओ संस्था की ओर से बाल भिक्षावृत्ति और बालश्रम के मामले रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान लोकल पुलिस की मदद से बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें बाल आश्रय गृह भेजा जा रहा है। इसमें लड़कों को सपर्मण खुला आश्रय गृह चंदरनगर में और बालिकाओं को बालिका निकेतन केदारपुरम् में रखा गया है।
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रेस्क्यू के दौरान बच्चों ने बताया कि हमारे मां-बाप कहते हैं कि घर चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। काम नहीं करोगे तो घर कैसे चलेगा। रोजाना मिलने वाले पैसे से हम अच्छा खाना खा सकेंगे। वहीं, भिक्षावृत्ति वाले बच्चे अच्छे घरों के थे लेकिन उनके माता-पिता पैसों का लालच देकर बच्चों से भीख मंगवाते थे। बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक सुरेश उनियाल ने बताया कि ऋषिकेश के शांतिनगर (पुराना बस स्टैंड के पीछे) एक दुकान में बालश्रम करने वाले पांच बच्चे और भिक्षावृत्ति वाले बच्चों को नेहरू कॉलोनी देहरादून से रेस्क्यू किया गया है।
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Iइन सभी का रहा सहयोग
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संस्था के सुरेश उनियाल ने बताया कि न्यू ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, लेबर डिपार्टमेंट, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्डलाइन, मैक संस्था, आसरा ट्रस्ट, समर्पण सोसायटी और बचपन बचाओ आंदोलन साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इन सभी के सहयोग से बच्चों को रेस्क्यू किया जाता है। इसके अलावा पुलिस की मदद ली जाती है।


Iफोन कराकर बनाते हैं दबाव
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रेस्क्यू करने वाली टीमों ने बताया कि जहां पर बच्चे बालश्रम करते हैं वहां पर जब रेस्क्यू टीम जाती है तो बच्चों का रेस्क्यू करना मुश्किल हो जाता है। इस दौरान वहां के दुकानदार ऊपर से फोन करवाकर दबाव बनाते हैं कि बच्चों को काम करने दिया जाए और इनका रेस्क्यू न किया जाए। इसके अलावा वह हवाला यह देते हैं कि ये बच्चे पढ़ते नहीं हैं। कुछ काम करेंगे तो गलत आदत नहीं लगेगी। नशे से भी दूर रहेंगे।
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