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मासूमों पर टूटा दुखों का ऐसा पहाड़ की नम हुई सबकी आंखें

Sat, 25 Jul 2015 05:42 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 25 Jul 2015 05:42 PM IST
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parents died children left alone in dehradun.

पिछले दिनों ऐसी घटनाएं सामने आई जिनसे राजधानी देहरादून में दो मासूमों की दुनिया उजड़ गई। सब कुछ होने के बाद भी अब उनके पास कुछ नहीं है।

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देहरादून में शुक्रवार को इन दोनों घटनाओं के बारे में जिसने भी सुना उनका दिल पसीज गया। दून में क्लेमेंटटाउन निवासी मेजर पवन कुमार बोहरा और उनकी पत्नी रीना बोहरा की असम में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। दुर्घटना में उनका 15 माह का बेटा अर्जुन बच गया।
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शुक्रवार को जब मेजर और उनकी पत्नी का शव क्लेमेंटटाउन स्थित आवास पहुंचा तो परिवार सदमे में था। मासूम अर्जुन मम्मी-पापा के लिए दिनभर रोता रहा। कभी दादी तो कभी मासी के पास वह मम्मी-पापा से मिलने की जिद करता रहा।
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इंजीनियरिंग सर्विस में तैनात 35 वर्षीय मेजर पवन कुछ समय पहले असम में तैनात हुए थे। उनकी पत्नी और बेटा साथ ही रहते थे। 20 जुलाई को पवन पत्नी और बेटे के साथ निजी कार से कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

गाड़ी लुढ़की तो रीना ने बेटे को गोद से उठाकर बाहर निकाल दिया और पति-पत्नी कार में फंसकर नीचे खाई में पहुंच गए। हादसे में दोनों की मौत हो गई, लेकिन नन्हा अर्जुन बच गया। अर्जुन की मौसी कृष्णा सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और असम में तैनात हैं। वही मेजर पवन और रीना का शव लेकर दून आई।

पवन की माता योगमाया बोहरा सदमे में हैं। उनके छोटे बेटे ने बड़े भाई-भाभी का अंतिम संस्कार किया। कृष्णा ने बताया कि परिवार के लिए यह बड़ा सदमा है। इससे उबर पाना आसान नहीं है। सबसे बड़ी चिंता अर्जुन की है। वह इतना छोटा है कि अपनी बात तक नहीं कह सकता। मासूम अर्जुन को हल्की चोटें आई हैं, लेकिन खतरे की कोई बात नहीं है।

माता-पिता के जाने के बाद अकेला रह गया हर्ष

parents died children left alone in dehradun.

शूरवीर सिंह भंडारी/ अमर उजाला, मसूरी

मसूरी में लाइब्रेरी स्थित बाजार के प्रतिष्ठित व्यापारी और होटल कारोबारी सुमित अग्रवाल दंपति ने मंदिर की छत से कूदकर जीवन लीला समाप्त कर दी। इस हृदय विदारक घटना से पूरा शहर सदमे में है। दंपति की मौत के बाद बेटे हर्ष और कारोबार के संबंध में मित्र-परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

सभी की चिंता यही है कि हर्ष को कौन संभालेगा? कारोबार का क्या होगा? दस साल की छोटी सी उम्र में हर्ष के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अग्रवाल परिवार के नाते-रिश्तेदार और सुमित के पारिवारिक दोस्त अब हर्ष के वयस्क होने तक उसकी पढ़ाई-लिखाई की चिंता में हैं। व्यापार किस तरह से संचालित किया जाए?

इसे लेकर भी रिश्तेदारों के बीच कई सुझाव आपस में रखे गए। नेचुरल लॉ के अनुसार हर्ष पूरी संपत्ति का अकेला वारिस है। मगर वयस्क होने तक कारोबार किस तरह से चलाया जाए? इस पर भी विचार किया गया। शुक्रवार को सुमित के पारिवारिक लोग और चारु के मायके वालों ने शाम को दुकान खोली।

हर्ष के लालन-पालन को लेकर चर्चा की। सुमित के करीबी दोस्त आशीष गोयल का कहना है कि पारिवारिक लोग और दोस्त बस अब सुमित के बेटे हर्ष और वयोवृद्ध मां की के पालन-पोषण की चिंता में हैं। आशीष ने बताया कि फरवरी माह में वे हांगकांग, मकाऊ गए थे।

सुमित इतनी जल्दी डिप्रेशन में आकर जान दे देगा, इस बात का दूर-दूर तक भी अंदेशा नही था। मसूरी के खुशहाल परिवारों में सुमित का परिवार भी शुमार था। सुमित की तीन बहन हैं। दो बहन की शादी देहरादून के प्रतिष्ठित व्यापारियों से हुई है। एक बहन दिल्ली में है। सुमित अकेला भाई था। सुमित का लाइब्रेरी में जनरल डिपार्टमेंटल स्टोर और हिमालयन ब्रीज नाम से एक होटल है।

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