इस पेंगोलिन का बच्चों से प्यार देख हैरान रह जाएंगे
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सिर्फ रात के अंधेरे में ही जंगल में बाहर निकलना और जरा सी आहट पर खौफजदा होकर गेंद की शक्ल में बदल जाने वाला मादा पेंगोलिन का मिजाज देहरादून के मालसी डियर पार्क में बदल गया है। बतौर मेहमान यहां रेस्क्यू करके लाई गई मादा पेंगोलिन अब ‘सोशल’ हो गई। जैसे ही उसके कानों में किसी बच्चे की आवाज जाती है, वह भरी दोपहरी बाड़े में बाहर आकर जाली से चिपक जाती है।
बच्चों के छू लेने पर वह गेंद नहीं बनती, बल्कि दुलार और ममता से अपनी गर्दन और आगे फैला देती है। छोटे बच्चे इसे ‘प्रिंसेस’ कहकर पुकारने लगे हैं।
देहरादून के सीमाद्वार क्षेत्र से रेस्क्यू करके मादा पेंगोलिन को यहां लाया गया था। खाने-पीने के मामले में इसके नखरों ने वनकर्मियों को खूब परेशान भी किया, लेकिन अब मालसी डियर पार्क घूमने आने वाले बच्चों ने दो हफ्ते में इसके मिजाज को ही बदल दिया है।
बच्चों की दुलारी, आवाज सुन निकल आती बाहर
दिन में घुप अंधेरे वाला दड़बा इसे अच्छा नहीं लगता। जैसे ही चहल-पहल हुई कि प्रिंसेस बाहर निकल आती है। बाड़े के तारों से चिपकी रहती है। बच्चों के स्पर्श से इसे डर नहीं लगता, बल्कि खुश होती है। अगर कोई बड़ा व्यक्ति इसके नजदीक आता है तो यह सिर नीचे पेट की तरफ घुसा लेती है। बड़ों से इसे डर लगता है।
पेंगोलिन के बदले मिजाज से वनकर्मी हैरान रहते हैं। उन्हें डर लगता है कि कोई उसे नुकसान न पहुंचा दे। वे कोशिश करते हैं कि पेंगोलिन अपने दड़बे में चली जाए। पेंगोलिन का मिजाज बदलना भी वनकर्मियों के लिए हैरत का सबब बना है।
वन विभाग अब पेंगोलिन को मालसी डियर पार्क में ही रखने का मन बना रहा है। पहले अधिकारियों ने सोचा था कि पेंगोलिन के सामान्य होते ही उसे जंगल में छोड़ देंगे। एसडीओ गुलबीर सिंह का कहना है कि अच्छा है पेंगोलिन ने खुद एडजस्ट कर लिया है।
पढ़िए, क्या कहते हैं विशेषज्ञ
-वन्य जीवों में ऐसी एडजस्ट करने की फैकल्टी होती है। उन्हें जब विश्वास हो जाता है कि सामने वाले से कोई खतरा नहीं है तो सामान्य व्यवहार करने लगते हैं। डर न होने पर वे अपने को एडजस्ट कर लेते हैं।
-डॉ. वीबी माथुर, निदेशक भारतीय वन्य जीव संस्थान
-यह पेंगोलिन मादा है। मादा वन्य जीवों में भी एडजस्ट करने की क्षमता अधिक होती है। किसी खतरे का आभास न होने पर वे जल्दी हिल-मिल जाती है।
-डॉ. अभिषेक सिंह, संयोजक इफैक्ट और पेंगोलिन को रेस्क्यू करने वाले