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उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2019 : 25 जुलाई से पहले से जिनके तीन बच्चे, वे लड़ सकेंगे चुनाव 

Fri, 20 Sep 2019 09:35 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 20 Sep 2019 09:35 AM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने संशोधन लागू होने की कट ऑफ डेट तय की
  • दो बच्चों से अधिक वालों को प्रतिबंधित करने वाली धारा संशोधित
  • अदालत ने माना परिवार कल्याण को प्रोत्साहित करने को है यह प्रावधान

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Panchayat elections 2019: High court verdict in case of more than two children candidate
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने व्यवस्था कर दी है कि 25 जुलाई 2019 से पहले से ही जिनके तीन बच्चे हैं, ऐसे प्रत्याशी पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। इस तिथि के बाद पैदा हुए तीसरे बच्चे के माता-पिता पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाएंगे।

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अदालत ने पंचायत चुनाव में दो से अधिक बच्चों वाले दावेदारों को अयोग्य घोषित करने वाली पंचायती राज संशोधन एक्ट की धारा को संशोधित करते हुए यह व्यवस्था दी है। अदालत के अनुसार इस संशोधन को लागू करने की कट ऑफ डेट 25 जुलाई 2019 होगी।
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पंचायती राज एक्ट में किए गए संशोधन को लागू करने के संबंध में अब तक कोई तिथि निर्धारित नहीं थी, जिसके चलते प्रत्याशियों में असमंजस था। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पूर्व में सुनवाई के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो बृहस्पतिवार को जारी किया गया। 

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शैक्षिक योग्यता : एक्ट का प्रावधान ही प्रभावी

दो बच्चों से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशियों को चुनाव में प्रतिबंधित करने के नए पंचायती राज एक्ट के प्रावधान को कोटाबाग निवासी मनोहर लाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख जोत सिंह बिष्ट समेत कई कांग्रेस नेताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार इस संशोधन को बैकडेट से लागू कर रही है, जबकि ऐसा कोई प्रावधान लागू किए जाने पर तीन सौ दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाता है, जो इस मामले में नहीं दिया गया।

याचिकाओं में कहा गया था कि एक ओर जहां को-ऑपरेटिव सोसायटी सदस्य दो से अधिक बच्चे होने की वजह से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, वहीं गांव में प्रत्येक प्रत्याशी किसी ना किसी को-ऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य है। वहीं, कोर्ट ने अपने निर्णय में माना कि दो बच्चों संबंधी प्रावधान परिवार कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने इस एक्ट में पंचायत प्रतिनिधियों के पदों के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल पास होने को भी चुनौती दी थी। अपने निर्णय में कोर्ट ने शैक्षिक योग्यता के संबंध में किए गए प्रावधान पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अधिवक्ताओं के अनुसार इसका निहितार्थ है कि शैक्षिक योग्यता को लेकर एक्ट में किया गया प्रावधान प्रभावी माना जाएगा। 

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