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परिसीमन तो किया लेकिन आरक्षण नहीं दिया
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 22 May 2014 09:00 PM IST
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देहरादून में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, लेकिन परिसीमन से बनी नई सीटों में अनु.जनजाति और अनु. जाति की जनसंख्या की अनदेखी हुई।
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आरक्षण में भी मनमानी
मामला कोर्ट पहुंचा तो आरक्षण में बदलाव किया गया। जनप्रतिनिधियों की माने तो कुछ अन्य सीटों के आरक्षण में भी मनमानी हुई है।
राजधानी में जिला पंचायत की पहले कुल 33 सीटें थीं, पंचायत राज विभाग इतनी ही सीटों पर इस बार भी चुनाव कराने की तैयारी में था।
लेकिन निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान एवं कुछ अन्य के हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायत सीटों का नये सिरे से परिसीमन किया गया।
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16.53 फीसदी जनसंख्या की अनदेखी
परिसीमन के बाद जिले में जिला पंचायत सदस्यों की 33 सीटों को बढ़ाकर 43 कर दिया गया, लेकिन परिसीमन से बनी नई सीट मैरावना में अनुसूचित जनजाति की 53.87 और अंबाडी में अनुसूचित जाति की 16.53 फीसदी जनसंख्या की अनदेखी कर दी गई।
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इससे जनप्रतिनिधियों को फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जनप्रतिनिधि कोर्ट पहुंचे तो आरक्षण में बदलाव किया गया।
ग्राम प्रधान संगठन के प्रांतीय प्रवक्ता मूलचंद शीर्षवाल ने कहा कि आरक्षण में कई स्थानों पर मनमानी हुई है।