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हरिद्वार अर्द्धकुंभ: जितने पंचांग उतने स्नान, श्रद्धालु परेशान

Fri, 15 Jan 2016 08:14 AM IST
कौशल सिखौला/ अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 15 Jan 2016 08:14 AM IST
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panchang confusion on haridwar ardh kumbh.

अर्द्धकुंभ के स्नानों को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अलग-अलग तिथियां घोषित की गई हैं। किसी भी पंचांग की तिथि मेला प्रशासन की ओर से घोषित स्नानों की सूची से मेल नहीं खा रही है।

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अब देशभर से यात्री अपने पुरोहितों और साधु-संतों से पूछ रहे हैं कि वास्तव में स्नान की तिथियां क्या-क्या हैं। स्नान की अलग-अलग तिथियां होने के कारण श्रद्धालु परेशान हैं। मेला प्रशासन 14 जनवरी मकर संक्रांति को अर्द्धकुंभ का पहला स्नान बता रहा है।
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इसके विपरीत जिस हरकी पैड़ी पर स्नान होना है उसकी प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा ने अपने पंचांग में पहला स्नान 12 फरवरी वसंत पंचमी का बताया है। काशी और राजधानी पंचांगों में भी पहला स्नान वसंत पंचमी का बताया गया है।
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प्रख्यात मार्तंड पंचांग पहला स्नान 7 अप्रैल चैत्र अमावस्या को बता रहा है। पंजाब का दिवाकर पंचांग और राजस्थान का चंडू पंचांग फाल्गुन द्वादशी 20 मार्च के दिन पहला स्नान लिख रहे हैं। इसी तरह अन्य पंचांगों में भी पहले स्नान की तिथि को लेकर मतभेद है। अलबत्ता किसी भी पंचांग ने मकर संक्रांति को अर्द्धकुंभ स्नान के रूप में नहीं लिखा है।

भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार अर्द्धकुंभ का केवल एक मुख्य स्नान 14 अप्रैल को होता है। अन्य सभी स्नान सहायक स्नान हैं। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में आने के बाद कुछ स्नान पड़ेंगे। पहला सहायक स्नान 7 अप्रैल चैत्र अमावस्या को होगा।

उधर, गंगा सभा विद्वत परिषद के संयोजक ज्योतिषाचार्य डॉ. संजीव शास्त्री के अनुसार प्राचीन काल से वसंत पंचमी ही पहले स्नान के रूप में मनाई जाती है। इस बार भी सभा ने अपने पंचांग में वसंत को ही पहला स्नान पर्व बताया है। काशी और राजधानी पंचांगों में भी वसंत को पहला स्नान बताया गया है।

हर पंचाग में अगल-अलग है स्नान

panchang confusion on haridwar ardh kumbh.

मार्तंड पंचांग
पहला स्नान - चैत्र अमावस - 7 अप्रैल
दूसरा स्नान - सम्वतसर - 8 अप्रैल
तीसरा स्नान - बैसाखी - 13 अप्रैल
चौथा स्नान - चैत्र एकादशी - 17 अप्रैल
पांचवा स्नान - चैत्र पूर्णिमा - 22 अप्रैल
छठा स्नान - बैसाख एकादशी - 3 मई
सातवां स्नान - बैसाख अमावस्या - 6 मई
आठवां स्नान - अक्षय तृतीया - 9 मई
नौवां स्नान - गंगा सप्तमी - 12 मई

दिवाकर पंचांग

पहला स्नान - फाल्गुन द्वादशी - 20 मार्च
दूसरा स्नान - चैत्र अमावस्या - 7 अप्रैल
तीसरा स्नान - सम्वत्सर - 8 अप्रैल
चौथा स्नान - मेष संक्रांति - 13 अप्रैल
पांचवा स्नान - चैत्र अष्टमी - 14 अप्रैल
छठा स्नान - चैत्र एकादशी - 17 अप्रैल
सातवां स्नान - चैत्र पूर्णिमा - 22 अप्रैल
आठवां स्नान - बैसाख एकादशी - 3 मई
नौवां स्नान - बैसाख अमावस्या - 6 मई

काशी व गंगा सभा पंचांग
पहला स्नान - वसंत पंचमी - 12 फरवरी
दूसरा स्नान - माघ पूर्णिमा - 22 फरवरी
तीसरा स्नान - महाशिवरात्रि - 7 मार्च
चौथा स्नान - चैत्र अमावस्या - 7 अप्रैल
पांचवा स्नान - नवसम्वत - 8 अप्रैल
छठा स्नान - मेष संक्रांति - 14 अप्रैल
सातवां स्नान - रामनवमी - 15 अप्रैल
आठवां स्नान - चैत्र पूर्णिमा - 22 अप्रैल
नौवां स्नान - बैसाख अमावस्या - 6 मई
दसवां स्नान - बैसाख तृतीया - 9 मई
11वां स्नान - गंगा सप्तमी - 13 मई
12वां स्नान - बैसाख पूर्णिमा - 21 मई

सभी कर्मों के लिए उत्तरायण का महत्व

panchang confusion on haridwar ardh kumbh.

सूर्य के मकर राशि में आने पर पुण्य कर्म प्रारंभ हो जाते हैं। मुंडन, यज्ञोपवीत, विवाह आदि के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा की जाती है। कई लोग कामना करते हैं कि उनके प्राण उत्तरायण में निकलें। भीष्म पितामह ने तो शर शैया पर लेटे हुए उत्तरायण आने की महीनों प्रतीक्षा की थी।

मकर संक्रांति से प्रारंभ हो रहा उत्तरायण छह माह चलेगा। एक महीने से रुके विवाह 15 जनवरी से प्रारंभ हो जाएंगे। इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के राशि में प्रवेश करते हैं। इस राशि में आने पर देव गुरु बृहस्पति के गुण भी क्षीण हो जाते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि मकर संक्रांति से समस्त शक्तियां शनि के पास आ जाएंगी।

दैत्य ग्रह शुक्र और बुध भी इस दिन से शनि की उपासना में लग जाएंगे। इस दिन से गंगा स्नान का महत्व बढ़ जाता है। मकर संक्रांति पर किया गया स्नान मोक्ष प्राप्त करता है। मान्यता है कि इसी दिन सभी मुहूर्त जन्म लेते हैं।

डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार 15 जनवरी को प्रात: 9 बजे मकर लगन में स्नान करना और अधिक शुरू रहेगा। इस दिन किसी पात्र में चावल दान देने से मनवांछित फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में बताया कि मकर संक्रांति का स्नान कर ब्राह्मणों को दान देना चाहिए।

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