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यहां योग में मुद्रा बनाई, वहां 'मसाज' की सिरदर्दी

Sat, 28 Sep 2013 09:53 AM IST
अमर उजाला, ऋषिकेश
अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Sat, 28 Sep 2013 09:53 AM IST
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panchakarma and yoga Center having run by a doctor

‘मैं अकेले ओपीडी देखूं या फिर पंचकर्म और योग सेंटर। दो डाक्टर थे, उन्हें भी विभाग ने अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया। ऐसे में अकेले क्या-क्या संभालूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा।

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पखवाड़ेभर में ही अच्छे-खासे अस्पताल की हालत डिस्पेंसरी जैसी हो गई है। मैं कभी दोमंजिले में पंचकर्म सेंटर में भाग रहा हूं तो कभी नीचे ओपीडी में, आगे क्या बताऊं।’
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हाल ही में हुआ लोकार्पण
यह कहानी है लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से मुनिकीरेती में नवनिर्मित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र की। बीती 14 तारीख को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे लोकार्पित किया।

तब चिकित्सालय को तमाम सुविधाओं से लैस कर आयुर्वेदिक चिकित्सा और पंचकर्म का रोल मॉडल बनाने के दावे कि ए गए थे, मगर तमाम दावे दो सप्ताह में ही हवा हो गए।

एक प्रभारी चिकित्साधिकारी के भरोसे व्यवस्था
हालत यह है कि पूरे तामझाम को एक प्रभारी चिकित्साधिकारी संभाले हुए हैं। जबकि लोकार्पण के दिन से यहां पंचकर्म और महिला चिकित्सा के लिए दो डाक्टरों की नियुक्ति की गई थी, मगर एक सप्ताह में ही दोनों का स्थानांतर गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार कर दिया गया।

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अस्पताल में आयुर्वेद, पंचकर्म, छार सूत्र, मेडिटेशन की सुविधाएं तो जुटा ली गई, मगर शुल्क निर्धारित नहीं किया गया। जिससे इन चिकित्सा पद्धतियों का लाभ लेने यहां पहुंचने वाले लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में चिकित्सालय महज डिस्पेंसरी बनकर रह गया है।

राजस्व के साधन की हो रही अनदेखी
चिकित्सालय अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही वाले मुनिकीरेती क्षेत्र में स्थापित है। यहां आने वाले सैलानी खासकर विदेशी गैर सरकारी संस्थानों में डालर खर्च करते हैं। इस केंद्र के चलने से उन्हें सरकारी दरों पर सारी सुविधाएं मिलने लगेंगी, जिससे सरकार को अच्छा खासा राजस्व मिल सकता है।

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अस्पताल के लिए हुआ था आंदोलन
वर्ष 2005-06 में तत्कालीन जिलाधिकारी टिहरी ने अस्पताल को तपोवन में शिफ्ट कर इसके स्थान पर गेस्ट हाउस बनाने की कवायद शुरू कर दी थी। जिसका स्थानीय नागरिकों ने विरोध किया था। इसके बाद प्रशासन ने हाथ पीछे खींचे और चिकित्सालय निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
मुनिकीरेती जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर स्थापित चिकित्सालय के संचालन पर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए। इसकी उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री और आयुर्वेदिक चिकित्सा निदेशक से बात की जाएगी।
- मनोज द्विवेदी, पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत मुनिकीरेती

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अस्पताल के लिए हमने लंबा संघर्ष किया है, विभाग को अस्पताल की व्यवस्थाएं बनाने को शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। नहीं तो एक बार फिर आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा।
- सतीश गुप्ता, सांसद प्रतिनिधि

अधिकारी की सुनिए
चिकित्सकों का स्थानांतरण मेरे स्तर पर नहीं शासन स्तर से हुआ है। पंचकर्म का शुल्क निर्धारण के लिए अधिकारियों को लिखा गया है। एक सप्ताह के अंदर चिकित्सालय में सारी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करा दी जाएंगी।
- डा. बलवीर सिंह भंडारी, कार्यवाहक जिला आयुर्वेदिक अधिकारी

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