{"_id":"8442fc4b541ed481e59d2f05fdce6454","slug":"panas-valley-project-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दून में पनाष वैली प्रोजेक्ट को झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दून में पनाष वैली प्रोजेक्ट को झटका
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 13 Mar 2015 04:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार साल के बाद दून प्रशासन ने पनाष वैली प्रोजेक्ट का अनापत्ति प्रमाण पत्र वापस लेने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
इससे आवासीय प्रोजेक्ट को झटका लगा है। तकरीबन 68 बीघा दायरे के इस प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में फ्लैट बने हैं। इससे प्रोजेक्ट के मानचित्र पर भी सवाल खड़ा हो सकता है। इस तरह की गड़बड़ियों की जांच के दायरे में शहर के और भी बिल्डर आए हैं। इनकी भी जांच की जा रही है।
एमडीडीए ने कागजात देखकर ही किया नक्शा पास
अनापत्ति वापस होने के बाद की स्थिति पर अभी एमडीडीए ने अपना नजरिया जाहिर नहीं किया है। प्राधिकरण के सचिव बंशीधर त्रिपाठी ने इतना भर कहा है कि वे प्रशासन को अनापत्ति प्रमाण पत्र वापस कर रहे हैं।
विज्ञापन
आवासीय प्रोजेक्ट के मानचित्र के संबंध में क्या निर्णय होता है, इस संबंध में लोग चिंतित हैं। यह एक सफल आवासीय प्रोजेक्ट रहा है। प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि एमडीडीए ने सारे कागजात देखकर ही इसका नक्शा पास किया था।
विज्ञापन
एमडीडीए अगर मानचित्र निरस्त करता है तो आवासीय प्रोजेक्ट में रहने वालों के सामने मुश्किल पैदा हो सकती है। प्रोजेक्ट के दायरे में ग्राम समाज और गोल्डन फोरेस्ट की भूमि होने के अंदेशा में शासन ने राजस्व विभाग को जांच के आदेश किए थे। इसके लिए राजस्व विभाग और हरिद्वार के राजस्वकर्मियों की टीमें बनीं थीं।
टीमों ने जांच करने के बाद रिपोर्ट राजस्व विभाग को सौंप दी। इसमें कहा गया है कि ग्राम समाज और गोल्डन फोरेस्ट की भूमि प्रोजेक्ट के दायरे में तो है लेकिन कोई निर्माण नहीं है।
बाद में विभाग ने यह रिपोर्ट शासन को पहुंचा दी थी। इधर, डीएम रविनाथ रमन ने भी एसडीएम सदर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी थी। टीम की जांच के बाद डीएम ने पनाष वैली प्रोजेक्ट को दी गई एनओसी रिकॉल करने के अधिकारियों को आदेश कर दिए।
फिलहाल तत्काल प्रभाव से एनओसी निरस्त कर दी गई है। एमडीडीए को इस संबंध में रिपोर्ट भेज दी गई है।
- रविनाथ रमन, डीएम
एकतरफा हो रही है जांच : राणा
पनाष वैली के संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र वापस लिए जाने के संबंध में प्रोजेक्ट के पार्टनर राजीव राणा का कहना है कि कार्रवाई एकतरफा की जा रही है। उन्हें न तो नोटिस दी गई और न कोई सूचना। जानकारी मिलने पर उन्होंने प्रशासन को पत्र देकर पूछा था कि प्रोपर्टी की जांच में क्या खामी निकली है।
राणा का कहना है कि जब कोई उनसे कुछ पूछेगा तभी तो वह कुछ बताएंगे। उन्हें न तो डीएम ने बुलाया है और न एसडीएम ने। उनका प्रोजेक्ट वर्ष 2011 का है। वर्ष 2012 में नक्शा पास हुआ था। कार्रवाई अब वर्ष 2015 हो रही है। उन्हें अभी तक एक भी नोटिस नहीं मिली है।
अचानक कैसे मिल गई गड़बड़ी
पनाष वैली प्रोजेक्ट का अनापत्ति प्रमाण पत्र वापस लेने वाले मामले में सब कुछ पारदर्शी नहीं है। प्रोजेक्ट का नक्शा पास होने और इसके तैयार होने के इतने दिन बाद शासन के उच्चाधिकारियों को इसमें गड़बड़ी का इलहाम कैसे हो गया? इसके पहले हुई जांचों को दरकिनार कर नए सिरे से जांच क्यों की गई? प्रोजेक्ट के खिलाफ कार्रवाई के बाद ये सवाल खड़े हो गए हैं।
इसके अलावा शासन के उच्चाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि जांच राजस्व परिषद के अधिकारियों और हरिद्वार के राजस्व कर्मियों से ही जांच क्यों कराई गई? क्या उन्हें तहसील सदर या दून जिले के किसी भी राजस्वकर्मी और एसडीएम पर भरोसा नहीं था? अगर नहीं था तो क्यों नहीं था? क्या शासन को अंदेशा था कि जिले के अफसरों की मिलीभगत है।
अगर है तो उन्हें दंडित क्यों नहीं किया जा रहा? इतने सारे सवालों में शासन के अधिकारी एक का भी जवाब नहीं दे रहे हैं। इससे अधिकारियों का आदेश भी शक के दायरे में आ रहा है।