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Dehradun News: 40 किलो चांदी और 13 तोला सोने से बन रही देवता की पालकी
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चालदा महासू देवता की पालकी बनाता कारीगर। स्रोत जागरूक पाठक
- फोटो : samvad
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जौनसार बावर और हिमाचल प्रदेश के आराध्य देव छत्रधारी चालदा महासू देवता की पालकी का निर्माण अब अंतिम चरण में है। 40 किलो चांदी और 13 तोला सोने से बनाई जा रही पालकी को 27 अगस्त को जागड़ा पर मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश कराया जाएगा। पर्व के लिए 13 खतों से संबंधित गांवों के ग्रामीण तैयारियों में जुटे हुए हैं।
छत्रधारी चालदा महासू देवता को चलायमान माना जाता है जो भक्तों की रक्षा के लिए लगातार एक से दूसरे स्थान पर प्रवास के लिए जाते रहते हैं। अभी देवता खत शैली के दोहा गांव स्थित मंदिर में विराजमान हैं। वर्ष 2014 में सिलगांव खत से अठगांव खत में आने पर स्थानीय लोगों ने देवता की एक अलग से पालकी बनाई थी। इसके बाद से प्रवास पर जाने के दौरान देवता की दो पालकी एक साथ चल रही थी। जून 2025 में 13 खतों के ग्रामीणों की बैठक में दो पालकियों को एक बनाने पर विचार हुआ। देवता की अनुमति मिलने पर दोनों पालकियों को एक बनाने का कार्य शुरू हुआ। चांदी व सोने से बनाई जा रही इस नई पालकी का निर्माण मुंधान गांव निवासी व कुशल कारीगर रमेशचंद्र कर रहे हैं। खत शैली के स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पालकी का निर्माण लगभग पूरा होने को है। पालकी को 24 अगस्त को स्नान कराने के बाद जागड़े के अवसर पर मंदिर में विराजमान कराया जाएगा।
छत्रधारी चालदा महासू देवता को चलायमान माना जाता है जो भक्तों की रक्षा के लिए लगातार एक से दूसरे स्थान पर प्रवास के लिए जाते रहते हैं। अभी देवता खत शैली के दोहा गांव स्थित मंदिर में विराजमान हैं। वर्ष 2014 में सिलगांव खत से अठगांव खत में आने पर स्थानीय लोगों ने देवता की एक अलग से पालकी बनाई थी। इसके बाद से प्रवास पर जाने के दौरान देवता की दो पालकी एक साथ चल रही थी। जून 2025 में 13 खतों के ग्रामीणों की बैठक में दो पालकियों को एक बनाने पर विचार हुआ। देवता की अनुमति मिलने पर दोनों पालकियों को एक बनाने का कार्य शुरू हुआ। चांदी व सोने से बनाई जा रही इस नई पालकी का निर्माण मुंधान गांव निवासी व कुशल कारीगर रमेशचंद्र कर रहे हैं। खत शैली के स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पालकी का निर्माण लगभग पूरा होने को है। पालकी को 24 अगस्त को स्नान कराने के बाद जागड़े के अवसर पर मंदिर में विराजमान कराया जाएगा।
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चालदा महासू देवता की पालकी बनाता कारीगर। स्रोत जागरूक पाठक- फोटो : samvad
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