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मसूरी की शान रस्किन बांड को 'पद्मभूषण'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 26 Jan 2014 10:18 AM IST
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मसूरी की शान अंग्रेजी के जाने-माने उपन्यासकार रस्किन बांड को पद्मभूषण से अलंकृत किया गया है। इस घोषणा से नगर के साहित्यकारों के साथ ही समाजसेवी और राजनीतिकों में खुशी की लहर है।
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बांड ने इस अवॉर्ड का श्रेय अपने पाठकों को दिया है। कहा कि लेखक के लिए पाठक सबसे बड़े पुरस्कार हैं।
मसूरी में की पढ़ाई
19 मई 1934 में हिमाचल प्रदेश के कसौली जामनगर में पैदा हुए रस्किन बांड का बचपन मुफलिसी में गुजरा। प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा बिशप कॉटन शिमला, जामनगर, देहरादून और मसूरी में हुई। बांड ने हेम्पटनकोर्ट मसूरी में कुछ साल पढ़ाई की।
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ट्रेवस एजेंसी में किया काम
शुरुआती दौर में एक ट्रेवल एजेंसी थॉमस कुक में भी काम किया। वर्ष 1953 में इंग्लैंड में फोटोग्राफी फर्म में काम किया। बांड को लिखने का शौक बचपन से था।
उनके मित्र प्रो. गणेश शैली उन्हें पद्मभूषण मिलने पर गदगद हैं। प्रो. शैली के मुताबिक बांड जैसे उपन्यासकार बेहद कम होते हैं।
अविवाहित होने बावजूद भरा-पूरा परिवार
बांड की पहला उपन्यास द रूम ऑन द रूफ है। बांड अविवाहित हैं। मगर उनका भरा-पूरा परिवार है। एडाप्ट फैमिली में मौजूदा समय में परिवार में एक दर्जन लोग हैं।
उपन्यासों पर बनी कई फिल्में
बांड के उपन्यास पर कई हिंदी सीरियल बने हैं। दो तीन साल पहले बांड के उपन्यास सुसैनाज सेवन हजबैंड पर विशाल भारद्वाज निर्देशित फिल्म सात खून माफ बनी।
इससे पहले द ब्लू एंब्रेला बच्चों पर आधारित कहानी संग्रह पर बनी फिल्म ने भी खूब धूम मचाई। एक था रस्टी सीरियल तीन दशक पहले खूब चर्चाओं में रहा।