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Dehradun News: अनाथ बेटियों को छात्रावास में घर जैसा माहौल, वार्डन से मिला मां जैसा प्यार
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I- कोरोना काल में गुजर गए मां-बाप की अनाथ बेटियां यहां रह रहींI
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I- छात्राओं को पढ़ना, रहना, खाना निशुल्क, 200 रुपये स्कॉलरशिप भी मिलती हैI
आरकेडिया क्षेत्र के बनियावाला गोरखपुर चौक स्थित नेता जी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास में रह रहीं अनाथ बेटियों के जीवन में उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। उन्हें अपना भविष्य सुंदर और उज्जवल दिखाई दे रहा है। इस छात्रावास में छह से 16 साल की 152 अनाथ और बेसहारा छात्राएं रह रही हैं। जिन छात्राओं के पास अपना घर नहीं था उन्हें यहां अपने घर जैसा माहौल मिलता है। यहां रहकर वो पढ़ाई करती हैं। वार्डन मां की तरह उनका ख्याल रखती हैं। यहां पर अन्य लड़कियां उनकी सहेलियां हैं। पढ़ाई के साथ इनकी प्रतिभा को भी निखारा जा रहा है।
छात्रावास की वार्डन संगीता तोमर कहती हैं कि सरकार बेटियों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। पढ़ेंगी बेटियां तभी तो बढ़ेंगी बेटियां। इन बेटियों में किसी के मां-बाप कोरोना काल में गुजर गए थे, तो किसी की मां या पिता में कोई एक नहीं है। कुछ कूड़ा बीनने का काम तो कुछ मजदूरी करती थीं। अब इनका जीवन बेहतर बनता दिखाई दे रहा है। अब इन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है। पढ़-लिखकर कुछ करने की जरूरत है। यह सभी छात्रावास में रहती है और नजदीक सरकारी स्कूल में पढ़ने जाती हैं। इनके रहने, पढ़ने और खाने की व्यवस्था निशुल्क है। इसके अलावा हर महीने 200 रुपये स्कॉलरशिप भी दी जाती है।
I- बेटियों के लिए सिर्फ एक ऐसा छात्रावास -I
संगीता ने बताया कि जिले में इस तरह के चार छात्रावास हैं, लेकिन बेटियों के लिए ऐसा सिर्फ एक छात्रावास है। छात्रावास में कुल 25 कमरे हैं और इसमें 152 छात्राएं रहती हैं। एक कमरे में जहां चार छात्राओं के रहने की जगह है, वहां पर छह को रखना पड़ रहा है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार की ओर से दूसरा छात्रावास भी बनाया जा रहा है। यहां पर अन्य लड़कियां भी रहना चाहती हैं, लेकिन जगह न होने की वजह से नहीं आ पा रही हैं।
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I- छात्राओं को पढ़ना, रहना, खाना निशुल्क, 200 रुपये स्कॉलरशिप भी मिलती हैI
आरकेडिया क्षेत्र के बनियावाला गोरखपुर चौक स्थित नेता जी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास में रह रहीं अनाथ बेटियों के जीवन में उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। उन्हें अपना भविष्य सुंदर और उज्जवल दिखाई दे रहा है। इस छात्रावास में छह से 16 साल की 152 अनाथ और बेसहारा छात्राएं रह रही हैं। जिन छात्राओं के पास अपना घर नहीं था उन्हें यहां अपने घर जैसा माहौल मिलता है। यहां रहकर वो पढ़ाई करती हैं। वार्डन मां की तरह उनका ख्याल रखती हैं। यहां पर अन्य लड़कियां उनकी सहेलियां हैं। पढ़ाई के साथ इनकी प्रतिभा को भी निखारा जा रहा है।
छात्रावास की वार्डन संगीता तोमर कहती हैं कि सरकार बेटियों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। पढ़ेंगी बेटियां तभी तो बढ़ेंगी बेटियां। इन बेटियों में किसी के मां-बाप कोरोना काल में गुजर गए थे, तो किसी की मां या पिता में कोई एक नहीं है। कुछ कूड़ा बीनने का काम तो कुछ मजदूरी करती थीं। अब इनका जीवन बेहतर बनता दिखाई दे रहा है। अब इन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है। पढ़-लिखकर कुछ करने की जरूरत है। यह सभी छात्रावास में रहती है और नजदीक सरकारी स्कूल में पढ़ने जाती हैं। इनके रहने, पढ़ने और खाने की व्यवस्था निशुल्क है। इसके अलावा हर महीने 200 रुपये स्कॉलरशिप भी दी जाती है।
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I- बेटियों के लिए सिर्फ एक ऐसा छात्रावास -I
संगीता ने बताया कि जिले में इस तरह के चार छात्रावास हैं, लेकिन बेटियों के लिए ऐसा सिर्फ एक छात्रावास है। छात्रावास में कुल 25 कमरे हैं और इसमें 152 छात्राएं रहती हैं। एक कमरे में जहां चार छात्राओं के रहने की जगह है, वहां पर छह को रखना पड़ रहा है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार की ओर से दूसरा छात्रावास भी बनाया जा रहा है। यहां पर अन्य लड़कियां भी रहना चाहती हैं, लेकिन जगह न होने की वजह से नहीं आ पा रही हैं।
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