फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   organ donations means gift of life

अंगदान यानी दूसरे को जिंदगी का तोहफा

Tue, 06 Aug 2013 12:23 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Tue, 06 Aug 2013 12:23 PM IST
विज्ञापन
organ donations means gift of life

पौराणिक कथाओं को मानें तो सृष्टि का पहला अंगदान हमें हजारों साल पहले महर्षि दधिची के आश्रम में दिखता है। जहां वृत्रासुर के आतंक से परेशान इंद्रदेव याचक बने खड़े हैं और महर्षि से वज्र बनाने के लिए उनकी अस्थियां मांग रहे हैं। यह पहला बोन डोनेशन का केस था।

विज्ञापन


अस्थियों के अलावा शरीर के दूसरे अंगों को भी दान किया जा सकता है। इनमें आंखें, लीवर, गुर्दे, रक्त, हृदय समेत दूसरे अंग शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि एक खत्म होते शरीर से दूसरे व्यक्तियों की जिंदगी बचाई जा सकती है। खासतौर पर रोड एक्सीडेंट में मरने वाले व्यक्तियों के अंग दान पर जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन


युवाओं के अंग अधिक स्वस्थ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल एक लाख पांच हजार व्यक्ति रोड एक्सीडेंट में मरते हैं। इनमें 70 फीसदी युवा होते हैं। अधिक एक्सीडेंट बाइक से होते हैं। युवाओं के अंग अधिक स्वस्थ होते हैं। अगर ब्रेन डेथ के समय इनके अंग सुरक्षित कर लिए जाएं तो बहुत से लोगों का जीवन बच जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


डा. जेएस जोशी कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने बताया कि लोग अंगदान के प्रति जागरुक हों और समय से सूचना दें। इसके साथ ही अस्पतालों में अंग सुरक्षित रखने की सुविधा हो।  

इन अंगों को कर सकते हैं दान
गुर्दा दान:- जीते जी दे सकते हैं। बीमारी और दुर्घटना के मामले ब्रेन डेथ के फौरन बाद किडनी निकाल ली जाए।
आंखें (कार्निया) दान:- मरने के छह घंटे के अंदर आंखें सुरक्षित कर लें। 12 घंटे तक आंख ली जा सकती है लेकिन क्वालिटी खराब हो जाएगी।
लीवर दान:- जीते जी दे सकते हैं। बीमारी और दुर्घटना के मामले ब्रेन डेथ के फौरन बाद लीवर निकाल लिया जाए।
त्वचा दान:- व्यक्ति की ब्रेन डेथ के फौरन बाद त्वचा सुरक्षित कर लें। जीवित व्यक्ति भी त्वचा का कुछ हिस्सा दान कर सकता है।
हृदय दान:- ब्रेन डेथ के फौरन बाद सुरक्षित कर लिया जाए।
रक्तदान:- जीते जी दान किया जा सकता है। मरने के बाद नहीं।
शुक्राणु दान:- जीते जी किया जा सकता है। मरने के बाद नहीं।
अस्थि दान:- व्यक्ति की मृत्यु के फौरन बाद सुरक्षित की जाती है।
स्टेम सेल दान:- जीते जी व्यक्ति दान कर सकता है।
अग्नाशय:- ब्रेन डेथ के फौरन बाद सुरक्षित कर लिया जाए।
आंतें:- ब्रेन डेथ के फौरन बाद सुरक्षित कर लिया जाए।

खबर पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed