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एक पायलट के भरोसे ‘जीवनदायनी’ सेवा
सुपा सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, साहिया
Updated Tue, 10 Dec 2013 07:06 PM IST
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उत्तराखंड के चकराता में 108 सेवा महज एक पायलट (ड्राइवर) के भरोसे चल रही है। पायलट के रेस्ट पर चले जाने से लोगों की जान पर बन आती है।
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चकराता स्थित 108 सेवा से 80 गांवों की आबादी जुड़ी हुई है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले चकराता में पायलट के छुट्टी पर होने के कारण कई मर्तबा साहिया से एंबुलेंस भेजना पड़ता है।
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सीएचसी साहिया की चकराता से दूरी 25 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में 108 के पहुंचने में देरी होने पर लोगों की जान पर बन आती है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण सेवा होने के बाद भी प्रबंधन अन्य पायलटों की तैनाती करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
क्या है नियम
प्रत्येक एंबुलेंस में तीन पायलट और इतने ही फार्मासिस्ट होते हैं। 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में तीन पायलट काम करते हैं। लेकिन चकराता स्थित 108 एक माह से महज एक पायलट के ही भरोसे दौड़ रही है।
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वह भी 12 घंटे काम कर रहा है। ऐसे में पायलेट की कमी के चलते ही 108 लोगों को चौबीस घंटे की सेवाएं नहीं दे पा रही हैं।
108 के थमे पहिए
साहिया स्थित 108 सेवा के पहिए भी पिछले दो दिनों से थमे हुए हैं। गाड़ी का कमानी पट्टा टूटने के कारण पिछले दो दिनों से 108 सेवा साहिया वर्कशॉप में खड़ी है। ऐसे में चकराता स्थित 108 के पायलट के रेस्ट पर होने से जौनसार की स्वास्थ सेवा विकासनगर स्थित 108 के भरोसे है।
हादसे से भी नहीं लिया सबक
15 नवंबर को समय पर 108 के न पहुंचने पर धारिया निवासी 50 वर्षीय संवारी देवी की जान चली गई। तब साहिया स्थित 108 सेवा महज एक पायलट के भरोसे थी।
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ऐसे में चकराता स्थित 108 सेवा के घटनास्थल पर देरी से पहंचने के कारण महिला की मौत हो चुकी थी। उस समय तो विभाग ने साहिया में एक अन्य पायलट की तैनाती तो कर दी लेकिन घटना से सबक लेना मुनासिब नहीं समझा।
वास्तव में चकराता में एक माह से पायलट की कमी चल रही है। दो दिन के भीतर नए पायलट की तैनाती कर दी जाएगी।
- अरविंद शर्मा, जिला प्रभारी 108 सेवा