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Dehradun News: सरकारी अस्पतालों में कार्डियोलॉजिस्ट की कमी, सर्दी में बढ़ रहे हार्ट के मरीज
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I- प्रदेश के एकमात्र मेडिकल कॉलेज दून अस्पताल में कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती
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I- अन्य जिलों से रेफर होकर दून अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे मरीजI
सरकारी कार्डियोलॉजिस्ट के नाम पर प्रदेश में सिर्फ दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इकलौते डॉ. अमर उपाध्याय की तैनाती है। हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में सर्दी में बढ़ रही हार्ट के मरीजों की संख्या का भार अकेले दून अस्पताल पर है। यहां राज्य के दूसरे जिलों से हार्ट के मरीज रेफर होकर आ रहे हैं।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर उपाध्याय ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ ही हार्ट की समस्याओं के मामले बढ़ने लगे हैं। रोजाना एक-दो मरीज हार्ट अटैक और दो-तीन मरीज हार्ट फेल्योर के आ रहे हैं। हार्ट अटैक होने पर एंजियोप्लास्टी की जाती है। जबकि, हार्ट फेल्योर में जांच रिपोर्ट के अनुसार इलाज किया जाता है। बताया कि सर्दी से बचे रहने के इंतजाम होने जरूरी हैं। अन्यथा धमनियों में सिकुड़न आने से रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है।
Iचार से छह लाख में भी नहीं मिल रहे डॉक्टरI
बता दें कि सरकार को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के लिए कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं न्यूरोलॉजिस्ट भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि, सरकार कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर डॉक्टर को चार से छह लाख रुपये तक प्रतिमाह वेतन देने की बात कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से कोरोनेशन अस्पताल में पीपीपी मोड पर हार्ट सेंटर चलाया जा रहा है। यहां पर निजी अस्पताल के डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
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I- अन्य जिलों से रेफर होकर दून अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे मरीजI
सरकारी कार्डियोलॉजिस्ट के नाम पर प्रदेश में सिर्फ दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इकलौते डॉ. अमर उपाध्याय की तैनाती है। हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं। ऐसे में सर्दी में बढ़ रही हार्ट के मरीजों की संख्या का भार अकेले दून अस्पताल पर है। यहां राज्य के दूसरे जिलों से हार्ट के मरीज रेफर होकर आ रहे हैं।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर उपाध्याय ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ ही हार्ट की समस्याओं के मामले बढ़ने लगे हैं। रोजाना एक-दो मरीज हार्ट अटैक और दो-तीन मरीज हार्ट फेल्योर के आ रहे हैं। हार्ट अटैक होने पर एंजियोप्लास्टी की जाती है। जबकि, हार्ट फेल्योर में जांच रिपोर्ट के अनुसार इलाज किया जाता है। बताया कि सर्दी से बचे रहने के इंतजाम होने जरूरी हैं। अन्यथा धमनियों में सिकुड़न आने से रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है।
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Iचार से छह लाख में भी नहीं मिल रहे डॉक्टरI
बता दें कि सरकार को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के लिए कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं न्यूरोलॉजिस्ट भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि, सरकार कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर डॉक्टर को चार से छह लाख रुपये तक प्रतिमाह वेतन देने की बात कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से कोरोनेशन अस्पताल में पीपीपी मोड पर हार्ट सेंटर चलाया जा रहा है। यहां पर निजी अस्पताल के डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
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