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अब घर बैठे पास होंगे उत्तराखंड में भवनों के नक्शे
अरविंद सिंह/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 30 Jun 2016 02:49 AM IST
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- फोटो : Demo pic
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प्रदेश के पांच प्राधिकरण क्षेत्रों में लोगों को अब आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे पास कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इन प्राधिकरण क्षेत्रों में नक्शे पास करने की ऑनलाइन व्यवस्था जल्द शुरू की जा रही है। इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने का काम चल रहा है।
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मौजूदा समय में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में नक्शा ऑनलाइन पास करने का ट्रायल चल रहा है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य सभी प्राधिकरण और विनियमित क्षेत्रों में मैनुअल व्यवस्था चल रही है। सरकार अब एमडीडीए के साथ ही चार अन्य प्राधिकरण क्षेत्रों में भी नक्शे पास करने की ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने जा रही है।
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इन चार प्राधिकरणों में उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा), देहरादून क्षेत्र विशेष प्राधिकरण (साडा), हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) और झील विकास प्राधिकरण नैनीताल शामिल हैं। व्यवस्था लागू करने के लिए इन दिनों सॉफ्टवेयर विकसित करने का काम चल रहा है।
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नए बायलॉज में ये है प्रावधान
उडा के संयुक्त मुख्य प्रशासक वंशीधर तिवारी ने बताया कि बायलॉज में किए जा रहे संशोधन के मुताबिक नक्शों के सुपर विजन और उसके अनुसार निर्माण पूर्ण करने की जिम्मेदारी आर्किटेक्ट व स्ट्रक्चरल इंजीनियर की होगी। व्यावसायिक भवनों के मानचित्र स्वीकृति में वन विभाग, बिजली, फायर ब्रिगेड समेत दर्जनभर विभागों से लिए जाने वाले प्रमाण पत्रों के लिए भी बायलॉज में संशोधन किया जा रहा है।
नए प्रावधानों के तहत व्यावसायिक भवनों का मानचित्र स्वीकृत करते समय सभी विभागों के अधिकारियों को ऑनलाइन सूचना देकर नियत तिथि और समय पर एक साथ बुलाकर अनापत्ति प्रमाण पत्र की सारी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नए बायलॉज के अनुसार निरीक्षण उपरांत 48 घंटे के भीतर तमाम विभागों के अफसरों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर नक्शे पास कराते समय किसी भी प्रकार की हेराफेरी न कर सकें इसके लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। हेराफेरी पर आइपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
भवनों की जांच पर फोकस करेंगे अभियंता
ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों में तैनात अभियंताओं के पास मानचित्र स्वीकृत करने की जिम्मेदारी लगभग समाप्त हो जाएगी। ऐसे में विकास प्राधिकरणों में तैनात तमाम अभियंता अनाधिकृत तरीके से होने आवासीय, व्यावसायिक भवनों की जांच पर पूरा फोकस कर सकेंगे।