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'समाधान' से भी नहीं निकला समाधान
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 18 Aug 2014 07:54 PM IST
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जन समस्या निस्तारण के लिए शुरू हुई समाधान योजना भी सरकारी फाइलों में दम तोड़ती नजर आ रही है। समाधान पोर्टल के माध्यम से ऑन लाइन शिकायतों का निवारण होना था। लेकिन डेढ़ वर्ष के भीतर ही हालात बदतर हो चले।
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595 शिकायतें लंबित
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जिला स्तर से लेकर शासन स्तर पर 595 शिकायतें लंबित पड़ी हैं। लेकिन ना कोई मॉनिटरिंग और ना ही संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई जैसी बात।
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डेढ़ वर्ष पहले राज्य सरकार ने समाधान पोर्टल लांच कर जन शिकायतों का निस्तारण ऑनलाइन करने की शुरुआत की।
शुरुआती दौर में तो माहौल ठीक था लेकिन थोडे़ ही दिन बाद अधिकारियों का इस योजना के प्रति उदासीन रवैया सामने आने लगा। वर्तमान में समाधान पोर्टल पर ऑनलाइन लंबित शिकायतों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है।
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राज्य में 101 निदेशालय
जिलों में अभी भी 54 प्रत्यावेदन पेंडिंग हैं जिनमें सबसे ज्यादा देहरादून में 25 शिकायतें लंबित पड़ी हैं। राज्य में 101 निदेशालय हैं। इन निदेशालयों के स्तर पर भी 190 शिकायतें लंबित पड़ी है जिनका समाधान किया जाना है।
नियम यह है कि यदि कोई निस्तारण होने लायक नहीं है तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाए। निदेशालय में भी सर्वाधिक 21 शिकायतें पुलिस महानिदेशालय में लंबित हैं।
17 शिकायतें जीएम उत्तराखंड वित्त विकास निगम, नौं-नौं शिकायतें समाज कल्याण व पेयजल निगम निदेशालय में पड़ी धूल फांक रही है।
शासन स्तर पर 351 शिकायतें समाधान पोर्टल पर समाधान होने का इंतजार कर रही है। इनमें सर्वाधिक 30-30 तकनीकी शिक्षा व ऊर्जा विभाग में पड़ी है। पीडब्लूडी में 20, आपदा प्रबंधन में 19, कार्मिक विभाग में 21, वन विभाग में 14 शिकायतें लंबित हैं। अन्य विभागों में भी स्थिति जस की तस बनी है।