{"_id":"57cf1e9a4f1c1b255631876f","slug":"one-thousands-water-sources-will-be-alive","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड के एक हजार परंपरागत जलस्रोत होंगे जिंदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड के एक हजार परंपरागत जलस्रोत होंगे जिंदा
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 07 Sep 2016 01:26 AM IST
विज्ञापन
Water
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश कैंपा ने 346.80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पास कर केंद्र को स्वीकृति के लिए भेज दिया है। इस धनराशि से उत्तराखंड में एक हजार परंपरागत जलस्रोतों को फिर से जिंदा किया जाएगा। इसके साथ ही पांच सौ नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा। जल के मद में 46.50 करोड़ का प्रस्ताव पास किया गया है।
विज्ञापन
कैंपा स्टीयरिंग कमेटी की बैठक के बाद प्रस्तावों की सूची केंद्र को भेज दी गई है। स्वीकृति आने के बाद इन क्षेत्रों में काम शुरू हो जाएगा। प्रदेश की वन पंचायतों के विकास के लिए 10.35 करोड़ का प्रस्ताव पास हुआ है। इसके तहत 1667.22 हेक्टेयर में चारागाह विकसित किए जाएंगे। इसके साथ वन पंचायतों के विकास के लिए 64 माइक्रो प्लान तैयार किए जाएंगे।
विज्ञापन
दून में रोपे जाएंगे ढाई हजार पौधे
कैंपा के प्रस्ताव में राजधानी में ढाई हजार पौधे रोपे जाएंगे। इनके लिए ट्री गार्ड की भी व्यवस्था की जाएगी। ट्री गार्ड की व्यवस्था के साथ इतने ही पौधे मसूरी में रोपे जाने का प्रस्ताव है। अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में 185 हेक्टेयर भूमि पर ओक, देवदार के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए चार करोड़ की व्यवस्था की गई है। जंगली फलों और महल के पौधे के एक लाख पौधे लगाने की व्यवस्था की गई है।
विज्ञापन
इसके अलावा मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जंगली फलों के चार लाख पौधे लगाए जाएंगे। मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। इसके तहत 45 किमी बाड़, इलेक्ट्रिक फेसिंग और खाई बनाने आदि की व्यवस्था होगी। इसके लिए कैंपा से 13 करोड़ रुपये बजट की व्यवस्था की गई है। इसमें मुआवजा राशि भी शामिल है। तीन बंदर रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए पांच करोड़ की व्यवस्था की गई है।