'स्मार्ट' बनने के लिए दून के पास अभी भी है चांस
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स्मार्ट सिटी चयन की दौड़ में बने रहने के लिए देहरादून को एक और मौका मिला है। राज्य सरकार को इसके लिए पुरानी कमियां दूर कर नए सिरे से प्रस्ताव भेजना होगा।
शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने विभिन्न प्रदेशों के शहरी विकास सचिवों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की। शहरी विकास सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग में केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए देहरादून को कमियों में सुधार कर पुन: प्रस्ताव जमा करने का मौका दिया गया है। यह मौका देहरादून समेत 23 शहरों को दिया गया है।
बता दें कि स्मार्ट सिटी की चयन योजना के दूसरे चरण के लिए देश भर से 97 शहरों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए थे। 28 जनवरी को 20 शहरों की जो सूची केंद्र की ओर से जारी की गई उसमें देहरादून का नाम शामिल नहीं है। देहरादून का स्थान 97वें नंबर पर बताया गया है।
स्मार्ट सिटी योजना के पहले चरण में दून शहर का नाम नहीं आने से प्रदेशवासी मायूस हैं। इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों में आरोप प्रत्यारोप के दौर चल पड़ा है। इस बीच देहरादून शहर को प्रस्ताव में जरूरी सुधार कर एक और मौका मिलने से लोगों की आस में जग रही है।
सीएम साहब भी नहीं हैं नाउम्मीद
स्मार्ट सिटी चयन के मामले में पिछड़ने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सतर्कता के साथ पक्ष रखा। कई बार कुरेदने के बावजूद उन्होंने चयन में किसी तरह के राजनीतिक पूर्वाग्रह पर सहमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए जो तीन श्रेणी थीं, उनमें से किसी एक श्रेणी में प्रस्ताव भेजना था। हमने ग्रीन फील्ड वाली श्रेणी चुनी, लेकिन इस श्रेणी में देश भर से कोई शहर शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने केंद्र के प्रति नरम रुख रखते हुए कहा कि शायद समय के अभाव में केंद्र सरकार ग्रीन फील्ड श्रेणी के प्रस्तावों पर एक्सरसाइज नहीं कर सकी। इसलिए अप्रैल में संभावित 23 शहरों की सूची में देहरादून के चयन की उम्मीद है। यदि निराशा हाथ लगी तो फिर राज्य सरकार ही कोई निर्णय लेगी।
बीजापुर गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शेष दो श्रेणियों पर भी अपनी राय स्पष्ट की।
सीएम रावत ने बताई अपनी मुश्किल
उन्होंने कहा कि रेट्रोफिटिंग कैटेगरी के तहत प्रस्ताव क्यों नहीं भेजा, यह सवाल उठ रहा है, लेकिन इस श्रेणी में प्रस्ताव भेजने से फायदा नहीं था, क्योंकि पेयजल, सीवरेज सिस्टम पर पहले से ही काम चल रहा है। आधा काम तो हो चुका है। तीसरी श्रेणी रि-डेवलपमेंट की थी। इसका मतलब था कि हम पुराने शहर को ध्वस्त कर स्मार्ट सिटी बनाएं, जो ना संभव था न ही व्यवहारिक।
यह इतना नुकसानदायक और पीड़ादायक होता कि इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यदि ग्रीन फील्ड के आधार पर दून को अप्रैल में स्मार्ट सिटी मिलती है तो पेयजल के लिए भी जाखन और आसन नदी से इंटर लिंक एक कैनाल का प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि वहां पर ग्रीन कवर बरकरार ही नहीं रहे, बल्कि बढ़ाया भी जा सके।