मौत के तीन दिन बाद भी नहीं हो पाया बुजुर्ग का अंतिम संस्कार, इस इंतजार में बैठा रहा पूरा गांव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार मौत के तीन दिन बाद भी नहीं हो पाया। पूरा गांव और रिश्तेदार इस बात के इंतजार में बैठे रहे। आगे पढ़िए पूरा मामला...
दरअसल, उत्तराखंड के एक गांव में बेटे जेल में बंद होने के कारण बुजुर्ग का दाह संस्कार नहीं हो पाया। पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में बंद बेटे और उसकी मां को जब से सूचना मिली तो उन्होंने बाहर जाने की फरियाद की। इसकी इंतजार में तीन दिन तक बुजुर्ग का शव वहीं रखा रहा।
जेल से बाहर आकर किया अंतिम संस्कार
फिर, ग्रामीणों की फरियाद पर जेल में बंद बेटे को पैरोल मिलने के बाद शुक्रवार को शव का अंतिम संस्कार किया गया। तीन दिन पूर्व सत्ये सिंह के पिता की मौत हो गई थी, लेकिन पत्नी व बेटे के देहरादून जेल में बंद होने के कारण मृतक अतर सिंह का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया था।
गांव में अकेले रह रहे सत्ये सिंह के पिता अतर सिंह की 3 अक्टूबर को मृत्यु हो गई, लेकिन बेटे के मौके पर न होने के कारण किसी ने अंतिम संस्कार नहीं किया। मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ग्रामीणों और मृतक के रिश्तेदारों ने बीते बुधवार को डीएम टिहरी सोनिका से मृतक के अंतिम संस्कार के लिए बेटे व पत्नी को पैरोल पर छोड़ने को लेकर अर्जी दी।
डीएम ने गढ़वाल आयुक्त दिलीप जावलकर को मामले में अवगत कराया। जिस पर आयुक्त ने गुरुवार को सत्ये सिंह व इंद्रा देवी को तीन दिन के लिए पुलिस अभिरक्षा में पैरोल पर रिहा किया।