CAG का खुलासाः वैज्ञानिक नहीं, अधिकारी कर रहे हैं शोध
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संस्थान का नाम है अखिल भारतीय वानिकी शोध एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) और इससे जुड़े संस्थान। इसकी प्राथमिकता में है शोध कार्य।
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जाहिर है कि शोध वैज्ञानिक ही करेंगे। लेकिन हो यह रहा है कि शोध के लिए वैज्ञानिकों की जगह अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं। इस वजह से कभी देश-दुनिया में शोध के लिए जाना जाने वाले संस्थान की गुणवत्ता दांव पर लग गई है।
इस बात का खुलासा किया है सीएजी की एक रिपोर्ट ने। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में संस्थान की कई और कार्यप्रणालियों की पोल खोली है। इसके बाद से दून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है।
अपनी जान बचाने में जुट अधिकारी
रिपोर्ट सामने आने के बाद से एफआरआई और आईसीएफआरई के अधिकारी अपनी जान बचाने की जुगत लगा रहे हैं।
मार्च 2014 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के साइंटिफिक डिपार्टमेंट की टीम ने फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) पहुंचकर ऑडिट किया।
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ऑडिट रिपोर्ट दो अप्रैल-2014 को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्त सलाहकार और सचिव के अलावा एफआरआई के निदेशक व आईसीएफआरई के महानिदेशक को भेजी गई है।
रिपोर्ट में सीएजी ने जो अनियमितताएं पाई हैं, उनसे न केवल देश के सर्वमान्य वानिकी संस्थान की कार्यप्रणाली कठघरे में आ गई है, बल्कि नियमों और पैसे के साथ खिलवाड़ भी सामने आया है।
अनियमितताएं, जो आईं सामने
- जांच के दौरान पाया गया कि शोध संस्थानों में 104 आईएफएस अधिकारी डेपुटेशन पर कार्यरत थे।
इनमें ग्रुप कोआर्डिनेटर (रिसर्च), डिप्टी डायरेक्टर (रिसर्च) जैसे पदों पर भी शोध के मामले में अनुभवहीन आईएफएस अधिकारियों को तैनात किया गया है। सीएजी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि शोध क्षेत्र केवल शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के लिए ही होना चाहिए।
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- मार्च 1997 में आईसीएफआरई में 509 वैज्ञानिक, 1029 तकनीकी और 599 प्रशासनिक कर्मचारी के पद थे। सीएजी टीम की जांच के समय 362 वैज्ञानिक, 665 तकनीकी और 427 प्रशासनिक अधिकारी ही मिले। बाकी पदों पर नियुक्ति के लिए प्रयास ही नहीं किया गया।
ये भी हैं कुछ अनियमितताएं
- आईएफएस कुणाल सत्यरथ को जनवरी 2013 में डेपुटेशन पर आईसीएफआरई ज्वाइन कराया गया। जून 2013 से जून 2015 तक के लिए उन्हें विदेश ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, जबकि उनका डेपुटेशन का समय जनवरी 2016 तक ही है।
इस अधिकारी को केंद्र पोषित योजना के तहत भेजा गया, जबकि आईसीएफआरई के पास ऐसी योजना के इस्तेमाल का अधिकार ही नहीं है।
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इस अधिकारी को बिना सेवाएं दिए ही विशेष वेतन दिया जा रहा है। सीएजी ने साफ लिखा है कि यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
- डेपुटेशन पर लाए गए आईएफएस अधिकारी एमके शुक्ला, निदेशक इलाहाबाद को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजा।
बावजूद इसके उन्हें 50 प्रतिशत वेतन दिया जा रहा है। नियमानुसार उनके प्रमाण पत्रों की जांच करने के बाद उन्हें मूल विभाग में भेज दिया जाना चाहिए था।
वरिष्ठ पदों पर आईएएस और आईएफएस अधिकारियों की ताजपोशी से संस्थान के शोध के स्तर में गिरावट आई है। बड़े प्रोजेक्ट का हेड अगर वैज्ञानिक होगा तो निश्चित तौर पर उसके अनुभव उसको सफल बनाने में काम आएंगे, जबकि अगर कोई आईएएस या आईएफएस होगा तो उसका रुझान बजट की ओर ज्यादा होगा।
- डॉ. एमएस मेहता, पूर्व रिसर्च स्कॉलर, एफआरआई