पेट्रोल लेकर कॉलेज की छत पर चढ़े एनएसयूआई के दो छात्र नेता, घायल होने से एक के सिर पर लगे छह टांके
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उत्तराखंड के बागेश्वर में डिग्री कॉलेज में एनएसयूआई से जुड़े छात्रनेताओं ने शुक्रवार को हंगामा किया। शुक्रवार सुबह कॉलेज पहुंचे एनएसयूआई से जुड़े दो छात्र नेता स्पेशल बैक पेपर कराने और सीटें बढ़ाने की मांग पर पेट्रोल लेकर छत पर चढ़ गए।
वे दो घंटे तक छत पर हंगामा करते रहे। बाद में उतरते वक्त एक छात्रनेता घायल हो गया। उसे जिला अस्पताल लाया गया। उसके सिर में छह टांके लगे हैं। हालांकि उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
शुक्रवार को कॉलेज पहुंचे छात्रनेताओं ने कहा कि उन्होंने इन मांगों के लिए कई दिन अनशन किया था। सोमवार को तालाबंदी का एलान किया तो वहां पुलिस का पहरा लगा दिया गया। इसके बाद एनएसयूआई कार्यकर्ता प्रकाश वाछमी और रवि कोश्यारी शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे पेट्रोल की बोतल लेकर खिड़की के सहारे कला संकाय भवन की छत पर चढ़ गए।
उनके समर्थन में मैदान में खड़े छात्रनेता नारेबाजी करने लगे। सूचना मिलते ही कॉलेज, पुलिस, प्रशासन मौके पर पहुंचा। उन्होंने छात्रनेताओं से छत से उतरने को कहा तो उन्होंने पहले कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति से मांग पूरी करवाने को कहा।
प्राचार्य डॉ. मनोज उप्रेती ने नैनीताल मुख्यालय में बात कर घटना की जानकारी दी और उनकी मांग पूरी करवाने को कहा। नैनीताल से मांग पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद दोनों छात्रों से उतरने को कहा गया।
इसी दौरान दोपहर करीब साढ़े 12 बजे उतरते समय प्रकाश वाछमी गिरकर घायल हो गया, उसे जिला अस्पताल लाया गया। उसके सिर में छह टांके हैं। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
नारेबाजी करने वालों में एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष गोकुल परिहार, सूरज जोशी, देवेंद्र मेहरा, तनुज कुमार, रमेश दुबड़िया, तनुज परिहार, दिनेश दुबड़िया, भरत दानू, मोहित सिंह आदि थे। एसडीएम राकेश तिवारी, सीओ महेश चंद्र जोशी, कोतवाल टीआर वर्मा, डॉ. एसएस धपोला, डॉ. नरेश कुमार आदि ने छत पर चढ़े छात्रों को मनाया।
सावधानी बरती होती तो न होती घटना
अगर कॉलेज, पुलिस प्रशासन थोड़ी सावधानी बरतता तो घटना से बचा जा सकता था। लोगों का कहना था कि यह बवाल दो घंटे तक चला। उस समय तेज धूप थी। दोनों छात्रनेता टिनशेड की छत पर चढ़े थे। उन्हें प्यास भी लगी थी। तब तक प्रशासन को रस्सी, लंबी सीढ़ी, आपदा प्रबंधन या फायर पुलिस के संसाधन जुटा लेने चाहिए थे। ऐसा न हो पाने के कारण ही मामला बढ़ गया।
पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
पूर्व में ऐसे ही प्रयास में रामनगर और पिथौरागढ़ के दो छात्रनेता अपनी जान गंवा चुके हैं। यहां भी पहले कई प्रयास हो चुके हैं। तब कॉलेज प्रशासन ने छतों तक पहुंचे कई पेड़ कटवा दिये थे। इसके बावजूद शुक्रवार को दो छात्रनेता छत पर चढ़ गए।