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पहाड़ की महिलाओं पर अब कमाने की जिम्मेदारी भी

Tue, 23 Jul 2013 08:37 AM IST
विनय बहुगुणा
विनय बहुगुणा Updated Tue, 23 Jul 2013 08:37 AM IST
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now women have responsibility to earn

केदारघाटी जलप्रलय ने कई घरों के कुनबे ही खत्म कर दिए। इन घरों में जो लोग जीवित हैं, उनकी कमाई के साधन भी नहीं रहे। कमाई के साधन के साथ कमाने वाले भी काल का ग्रास बन गए हैं। ऐसे में इन परिवारों की महिलाओं पर ही घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई है।

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यह एक, दो परिवारों की कहानी नहीं है, बल्कि केदारघाटी के 53 गांवों के 157 परिवारों की है। इन परिवारों के कमाऊं सदस्य को आपदा ने छीन लिया। कमाई का साधन भी नहीं बचा। कई घरों में तो मासूम बच्चे, मां और बुजुर्ग दादी ही रह गई है, ऐसे में पति और बच्चों को खोने के गम में डूबी इन घरों की महिलाओं पर ही रोजी-रोटी का इंतजाम करने की जिम्मेदारी भी आ गई है।
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बणसू गांव में 18 वर्षीय लक्ष्मण इस बार घर की माली हालात को सुधारने की खातिर केदारनाथ में पालकी चलाने गया था। लेकिन वह भी लौटकर नहीं आया। लक्ष्मण की याद में उसके माता-पिता होश खो बैठते हैं।

केस एक
खेड़ा गांव के अवतार सिंह केदारनाथ में दूध का व्यापार करते थे। उनके साथ 16 वर्षीय बेटी पूर्ति और 12 वर्षीय बेटा भूपेंद्र भी था। ये दोनों भैंसों के लिए चारे का इंतजाम करते थे। पिता और दोनों बच्चों को आपदा लील गई। घर में अवतार सिंह की पत्नी बीमार है। इस स्थिति में इस वर्ष 12वीं पास करने वाली अवतार सिंह की बड़ी बेटी शांति के ऊपर ही घर की जिम्मेदारी भी आ गई है।

केस दो

गुप्तकाशी के त्यूड़ी गांव का विजय सिंह (45) केदारनाथ यात्रा के दौरान खच्चर चलाता था। यही उसकी आजीविका का साधन था, लेकिन 17 जून को आई आपदा में वह काल का ग्रास बन गया। अब घर में दो बेटे, एक बेटी है, जो छोटी कक्षाओं में पढ़ रहे हैं, 70 वर्षीय बुजुर्ग मां भी है। अब विजय सिंह की पत्नी पुष्पा देवी पर ही घर की आजीविका की जिम्मेदारी है।


केस तीन
त्यूड़ी गांव का 37 वर्षीय रघुवीर सिंह केदारनाथ यात्रा में गौरीकुंड से केदारनाथ तक खच्चर चलाता था। वह भी केदारघाटी जलप्रलय में समा गया। घर में उसके 10 और 8 साल के दो बेटे हैं, बीमार मां है। अब घर की जिम्मेदारी का बोझ रघुवीर सिंह की पत्नी सर्वेश्वर देवी (30 वर्षीय) के कंधों पर आ गया है।

इनका कहना है
हमने गांवों में जाकर टीम के साथ सर्वे किया है। इन घरों में न तो कोई संभालने वाला है और न ही कमाने वाला। सरकार को इनके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
- गजेंद्र नौटियाल सदस्य एसबीएमए/प्लान गैरसैंण

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