घने कोहरे और धुंध में ट्रेन को रास्ता दिखाएगा ये ‘त्रिनेत्र’
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अब घने कोहरे और धुंध में ट्रेनों का परिचालन प्रभावित नहीं होगा। ट्रेन पायलट त्रिनेत्र से कोहरे और धुंध में भी दो किमी की दूरी तक ट्रैक को स्पष्ट तौर पर देख सकेंगे। यह दृश्यता इतनी स्पष्ट होगी कि पटरी के क्रेक तक दिख जाएंगे।
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश में सर्दियों का असर सबसे ज्यादा दिखाई देता हैं। यहां घने कोहरे और धुंध होने पर दृश्यता नहीं होने से ट्रेनें लेट, निरस्त होती हैं। इसका खामियाजा रेलवे और यात्रियों दोनों को परेशानी का सामना करना भुगतना होता है। रेलवे ने घने कोहरे, धुंध में देखने वाला उपकरण तैयार किया है त्रिनेत्र।
इंफ्रो रेड, लेजर, उच्च क्षमता के कैमरे, जीपीएस की मदद से बनाए गए इस उपकरण की डिस्प्ले स्क्रीन इंजन के अंदर लगी होती है। इसकी मदद से लोको पायलट, सहायक लोको पायलट दो ट्रैक पर दो किमी की दूरी तक स्पष्ट देख सकेंगे। दृश्यता होने पर ट्रेनों का परिचालन पर असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल उत्तर रेलवे में इसका प्रयोग किया जा रहा है। प्रयोग सफल होने पर पूर्वोत्तर की ट्रेनों में इस उपकरण को लगाया जाएगा।
काठगोदाम की सात ट्रेनों में लगेगा त्रिनेत्र
शुरुआत में त्रिनेत्र सिर्फ सुपरफास्ट, मेल एक्सप्रेस में लगाया जाएगा। काठगोदाम से आठ ट्रेनों का संचालन होता है। इनमें एक सवारी गाड़ी है, जबकि सात एक्सप्रेस है। इस तरह पूर्वोत्तर रेलवे उपकरण लगाएगा तो यहां की सात ट्रेनों में लगता है।
पटरियों की पेट्रोलिंग शुरू
सर्दियां शुरू होते ही स्थानीय रेलवे प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। मुख्य यातायात निरीक्षक मोहन राम आर्य ने बताया कि लालकुआं से काठगोदाम और चमरुआ तक सभी पटरियों की पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। हर पेट्रोलमैन को रोजाना पेट्रोलिंग कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिये हैं। ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाई गई है।