अब 1500 एकड़ में बनेगी स्मार्ट सिटी, बाहरी हिस्सा होगा आउट
- प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल बड़ा होने की वजह से दौड़ में पिछड़ गया दून
- अंतिम समय में जबरन जोड़े गए नगर निगम क्षेत्र के कई वार्ड
- संशोधित प्रोजेक्ट में शहर का आधे से ज्यादा हिस्सा हटेगा
- प्रोजेक्ट जमा करने को सरकार के पास 30 जून तक का समय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दून का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट एक बार फिर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की भेट चढ़ गया। रेट्रोफिटिंग के प्रस्ताव में राजनीतिक दबाव के चलते अंतिम समय में शहर के कई इलाके जोड़े गए, जिसके चलते प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल बहुत ज्यादा हो गया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का प्रोजेक्ट अत्यधिक बड़ा है। अब संशोधित प्रस्ताव से सरकार शहर के कई इलाकों को हटाने जा रही है। सरकार के पास संशोधित प्रोजेक्ट जमा कराने के लिए 30 जून तक का समय है।
पहले चरण में टॉप-20 शहरों में नहीं चुने जाने के बाद देहरादून का संशोधित प्रोजेक्ट तैयार किया गया। लोगों को छह विकल्प देकर उनसे राय ली गई। सबसे ज्यादा लोगों ने ग्रीन फील्ड में स्मार्ट सिटी बनाए जाने के पक्ष में मतदान किया। हालांकि अंतिम समय में सरकार ने वोटिंग परिणामों को दरकिनार करते हुए जोन चार में रेट्रोफिटिंग का प्रस्ताव तैयार किया।
कुल 3788 एकड़ के प्रोजेक्ट, जिसमें चकराता रोड, सहारनुपर रोड और शिमला बाईपास रोड के बीच का क्षेत्र जिसमें घंटाघर, पलटन बाजार, खुड़बुड़ा, झंडा साहिब, लक्ष्मण रोड, इंदिरापुरम, जीएमएस रोड, मोहित नगर, बसंत विहार, राजेंद्र नगर, विजय पार्क, र्साइं लोक , माजरा आदि क्षेत्र शामिल हैं, का प्रस्ताव तैयार हुआ।
क्षेत्रफल ज्यादा होना बना बाहर होने की वजह
सरकार को प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की पूरी आशा थी लेकिन केंद्र ने एक बार फिर इस पर पानी फेर दिया। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल ज्यादा होने के कारण उसे स्वीकार नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने हालांकि प्रोजेक्ट का कोई अधिकतम क्षेत्रफल तय नहीं किया था। न्यूनतम 500 एकड़ का प्रस्ताव जमा कराने की अनिवार्यता थी।
केंद्र से यह जानकारी मिलने के बाद राज्य सरकार अब कई इलाकों को प्रोजेक्ट से हटाने पर विचार कर रही है। करीब 1500 एकड़ के लिए ही प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो शहर के बीच वाला क्षेत्र हटने की संभावना कम है। संभवत: शहर के बाहरी इलाकों को प्रोजेक्ट से हटाया जाएगा।
अंतिम समय में बढ़े 15 वार्ड
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अंतिम समय में नगर निगम क्षेत्र के करीब 15 वार्ड जोड़े गए थे। पहले प्रोजेक्ट में निगम का काफी कम इलाका शामिल था। बाद में अलग-अलग क्षेत्रों से दबाव पड़ने के चलते उन्हें भी प्रोजेक्ट से जोड़ा गया।
कम समय का प्रोजेक्ट चाहिए
ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट में 10 से 15 साल का वक्त लगता है। जबकि केंद्र सरकार दो से तीन साल में तैयार होने वाली परियोजना पर काम करना चाहती है। यही कारण है कि अधिक वक्त लेने वाले ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के बजाय कम समय लेने वाले रेट्रोफिटिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। हालांकि उत्तराखंड उसके बावजूद भी जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाया।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने प्रोजेक्ट ज्यादा बड़ा होने की जानकारी दी है। हम करीब चार हजार एकड़ के प्रस्ताव को संशोधित कर 1500 एकड़ के आसपास का बनाएंगे। 30 जून से पहले संशोधित प्रोजेक्ट तैयार कर लिया जाएगा।
-आर मीनाक्षी सुंदरम, नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी