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अब सीसी रोड की जगह इंटरलॉक टाइलों से बनेंगी सड़कें
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कारगी रोड पर टूटी सड़क पर बिछाई जा रही टाइल्स।
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शहर में सीसी रोड के स्थान पर अब इंटरलॉक टाइलों से सड़कें बनाई जाएंगी। राज्य योजना में अब सीसी रोड की स्वीकृति नहीं दी जा रही है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार इंटरलॉक टाइलों की सड़क जल्दी बनने के साथ-साथ सीसी रोड से ज्यादा कारगर भी है।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सीसी (सीमेंट कंक्रीट) रोड पर शुरुआती देखभाल बेहद मुश्किल होती थी। मसलन, यदि किसी व्यस्त इलाके में सड़क निर्माण किया जा रहा है तो वहां पर ट्रैफिक को नहीं रोका जा सकता है। जबकि नियमानुसार सीसी रोड निर्माण के बाद 28 दिनों तक तराई आदि के लिए छोड़ी जाती हैं। इसके बाद ही इन पर ट्रैफिक चलाया जा सकता है। ऐसे में निर्धारित समय तक तराई न होने के कारण सीमेंट कमजोर पड़ जाता है और सड़कें जल्दी टूट जाती हैं।
इधर, टाइलों से बनने वाली सड़कों में ऐसा नहीं है। फैक्ट्रियों से वही टाइलें ली जाती हैं जिनका प्रयोगशाला में पक्की होने की पुष्टि हो जाती है। नीचे कच्ची लेयर बिछाने के बाद ही टाइलें बिछाई जा सकती है। यही नहीं इन पर हाथ के हाथ ही ट्रैफिक को सुचारु भी किया जा सकता है। इन सब स्थितियों को देखते हुए राज्य योजना से सीसी रोड के स्थान पर अब इंटरलॉक टाइलों की सड़कों के निर्माण का पैसा जारी किया जा रहा है। हालांकि, जिला योजना में छोटी सड़कों के निर्माण को सीसी स्वीकृत किया जा रहा है।
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टूटी सड़कों की भी टाइलों से होगी मरम्मत
तारकोल से बनी जो सड़कें जल्दी टूट जाती हैं वहां भी अब इंटरलॉक टाइलों से ही मरम्मत की जाएगी। लोक निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जेएस चौहान ने बताया कि तारकोल की सड़कें पानी से जल्दी खराब हो जाती हैं। लिहाजा वहां पर सीमेंट से मरम्मत कराई जाती थी लेकिन अब मरम्मत भी इंटरलॉक टाइलों से ही की जाएगी।
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लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सीसी (सीमेंट कंक्रीट) रोड पर शुरुआती देखभाल बेहद मुश्किल होती थी। मसलन, यदि किसी व्यस्त इलाके में सड़क निर्माण किया जा रहा है तो वहां पर ट्रैफिक को नहीं रोका जा सकता है। जबकि नियमानुसार सीसी रोड निर्माण के बाद 28 दिनों तक तराई आदि के लिए छोड़ी जाती हैं। इसके बाद ही इन पर ट्रैफिक चलाया जा सकता है। ऐसे में निर्धारित समय तक तराई न होने के कारण सीमेंट कमजोर पड़ जाता है और सड़कें जल्दी टूट जाती हैं।
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इधर, टाइलों से बनने वाली सड़कों में ऐसा नहीं है। फैक्ट्रियों से वही टाइलें ली जाती हैं जिनका प्रयोगशाला में पक्की होने की पुष्टि हो जाती है। नीचे कच्ची लेयर बिछाने के बाद ही टाइलें बिछाई जा सकती है। यही नहीं इन पर हाथ के हाथ ही ट्रैफिक को सुचारु भी किया जा सकता है। इन सब स्थितियों को देखते हुए राज्य योजना से सीसी रोड के स्थान पर अब इंटरलॉक टाइलों की सड़कों के निर्माण का पैसा जारी किया जा रहा है। हालांकि, जिला योजना में छोटी सड़कों के निर्माण को सीसी स्वीकृत किया जा रहा है।
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टूटी सड़कों की भी टाइलों से होगी मरम्मत
तारकोल से बनी जो सड़कें जल्दी टूट जाती हैं वहां भी अब इंटरलॉक टाइलों से ही मरम्मत की जाएगी। लोक निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जेएस चौहान ने बताया कि तारकोल की सड़कें पानी से जल्दी खराब हो जाती हैं। लिहाजा वहां पर सीमेंट से मरम्मत कराई जाती थी लेकिन अब मरम्मत भी इंटरलॉक टाइलों से ही की जाएगी।