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Dehradun News: चाय बागान की 350 बीघा जमीन गलत तरीके से बेचने वाले चार लोगों को नोटिस, पढ़ें पूरा मामला
Thu, 18 May 2023 06:10 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 18 May 2023 06:10 PM IST
सार
चाय बागान की बेशकीमती जमीनों का भू-उपयोग धोखाधड़ी से बदलवाकर प्रॉपर्टी डीलर इनका सौदा करने में लगे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
रायपुर के रिंग रोड क्षेत्र में चाय बागान की करीब 350 बीघा सरकारी जमीन को गलत तरीके से बेचने के आरोप में चार लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण सीलिंग से चाय बागान को छूट मिली है। लिहाजा चाय बागान की जमीन को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता।
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चाय बागान की बेशकीमती जमीनों का भू-उपयोग धोखाधड़ी से बदलवाकर प्रॉपर्टी डीलर इनका सौदा करने में लगे हैं। इससे संबंधित शिकायतों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 350 बीघा जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई थी। इसी कड़ी में डीएम सोनिका के निर्देश पर मंगलवार को तीन हजार बीघा से अधिक भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई।
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वहीं, बुधवार को डीएम के निर्देश पर एडीएम वित्त ने चाय बागान की भूमि की खरीद-फरोख्त करने पर संतोष अग्रवाल, कुमुद डी वैद्य, आरती कुमार और दीपचंद अग्रवाल निवासी असम को सीलिंग एक्ट 1960 के अंतर्गत सेक्शन 35 का नोटिस देकर जवाब मांगा है। शिकायतकर्ता एडवोकेट विकेश सिंह नेगी का कहना है कि रायपुर, लाडपुर, चक रायपुर और नत्थनपुर की लगभग 350 बीघा जमीन को बेचने के आरोप में ये नोटिस जारी किए गए हैं। सीलिंग की इस जमीन को भू-माफिया, नेता और तहसील अधिकारियों के गठजोड़ से बेच दिया गया। यह जमीन अरबों की है।
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1975 के बाद का कोई भी सौदा मान्य नहीं
चाय बागान की यह जमीन रायपुर, लाडपुर, चक रायपुर और नत्थनपुर गांव के अंतर्गत आती है। यह जमीन वर्ष 1974 में सीलिंग एक्ट में आ गई थी। जमीन बचाने के लिए कुंवर चंद्रभान ने यहां रातों-रात चाय बागान बना दिया। मामला एसडीएम कोर्ट में गया। 31 जुलाई 1996 को अपर कलेक्टर जितेंद्र ने इस जमीन को सीलिंग से छूट देने का फैसला सुनाया। 24 अक्तूबर 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि 10 अक्तूबर 1975 के बाद इस जमीन की जो भी सेल डीड होगी वो शून्य हो जाएगी। यानी जमीन सरकार की होगी।
एमडीडीए कैसे पास कर रहा नक्शे?
चाय बागान की जमीन को गलत तरीके से बेचने के बाद बैंकों को गुमराह कर लोन भी कराया जा रहा है। एमडीडीए भी इन जमीनों पर नक्शे पास कर रहा है। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चाय बागान को मास्टर प्लान से गायब कर दिया गया है।
चाय बागान की भूमि को किसी प्रकार से खरीदा और बेचा नहीं जा सकता है। संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर दस्तावेज के साथ उपलब्ध होने को कहा गया है। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
-सोनिका, जिलाधिकारी