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बिल्डरों ने मारा गरीबों का हक, 114 के खिलाफ नोटिस

Thu, 05 May 2016 03:45 AM IST
अनिल चन्दोला/अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 05 May 2016 03:45 AM IST
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notice to 114 builder and colonizer for fraud.
नोटिस - फोटो : demo pic

राजधानी में हाउसिंग प्रोजेक्ट बना रहे बिल्डरों और कॉलोनाइजरों ने गरीबों का हिस्सा दबा रखा है। प्रत्येक प्रोजेक्ट में 10 फीसदी फ्लैट या प्लॉट इकोनोमिकल वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) के लिए होते हैं। ऐसा ना करने पर इसकी कीमत के बराबर धनराशि उन्हें संबंधित क्षेत्र के प्राधिकरण या विनियमित क्षेत्र प्राधिकारी को देनी होती है। लेकिन राजधानी के एक भी बिल्डर या कॉलोनाइजर ने ऐसा नहीं किया है।

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पहले एमडीडीए को सुध नहीं आई, लेकिन अब एक ताजा शासनादेश के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले 114 बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए नोटिस जारी जारी किया गया है।
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ऐसे किया घपला
दरअसल नवंबर 2011 में जारी शासनादेश के अनुसार प्रत्येक ग्रुप हाउसिंग और कॉलोनी के ले आउट प्रोजेक्ट में 10 फीसदी फ्लैट व प्लॉट दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए तैयार करने होते हैं। इनका आवंटन संबंधित प्राधिकरण, जिला प्रशासन और संबंधित बिल्डर या कॉलोनाइजर संयुक्त रूप से करते हैं।
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30 मार्च 2016 को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शासनादेश जारी करते हुए ईडब्ल्यूएस फ्लैट और प्लॉट ना देने वालों को उसकी कीमत के बराबर धनराशि (शेल्टर फंड) संबंधित प्राधिकरण को जमा कराने के निर्देश दिए। जिससे कि संबंधित प्राधिकरण गरीबों के लिए आवासीय परियोजना तैयार कर सके।

पांच साल के लिए मंजूर होता है प्रोजेक्ट
प्रत्येक प्राधिकरण और विनियमित क्षेत्र में प्रोजेक्ट पांच साल के लिए मंजूर किया जाता है। बाद में इसे एक-एक साल के लिए तीन बार बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश में 2011 के बाद से स्वीकृत हुए सभी प्रोजेक्ट में इडब्ल्यूएस के निर्माण के लिए 2019 तक का वक्त है। इसका फायदा उठाते हुए किसी भी प्रोजेक्ट में गरीबों का हिस्सा नहीं छोड़ा गया।

एमडीडीए ने शासनादेश जारी होने की तिथि के बाद स्वीकृत हुए सभी प्रोजेक्ट की जांच की तो पता चला कि एक भी बिल्डर ने इस महत्वपूर्ण शासनादेश का पालन नहीं किया है। अब एमडीडीए ने सभी संबंधित कारोबारियों को ईडब्ल्यूएस का प्रोजेक्ट तैयार कर जानकारी देने या उसके बराबर धनराशि जमा कराने का नोटिस जारी किया है। 

बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट बन सकेगा
ईडब्ल्यूएस का निर्माण करने के बजाय बिल्डर या कॉलोनाइजर अगर उसके बराबर धनराशि एमडीडीए के पास बतौर शुल्क जमा कराते हैं तो किसी एक स्थान पर गरीबों के लिए बड़ी आवासीय योजना बनाई जा सकती है। एमडीडीए सचिव पीसी दुमका ने बताया कि इस योजना पर विचार किया जा रहा है। पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्राधिकरण को कुल कितना राजस्व प्राप्त होगा, जिसे निर्माण पर लगाया जा सकता हो।


इनका है कहना
2011 के बाद जिन 114 ग्रुप हाउसिंग और कॉलोनी के नक्शे और ले आउट पास हुए, उनमें से किसी ने भी इडब्ल्यूएस का हिस्सा नहीं दिया है। ऐसे में शासनादेश के अनुसार नोटिस जारी किया गया है। तय मानकों के अनुसार उन्हें ईडब्ल्यूएस का हिस्सा देना ही होगा।
-प्रकाश चंद्र दुमका, सचिव, एमडीडीए

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