गंगा के लिए सरकार बदलेगी कानून: उमा
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगोत्री से उत्तरकाशी तक घोषित ईको सेंसिटिव जोन के मानकों में स्थानीय लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए संशोधन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी बीते दिनों के उत्तराखंड दौरे में इस बात के संकेत दिए थे।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के उत्तरकाशी में कार्यकर्ताओं की बैठक में पूर्व विधायक गोपाल रावत ने गंगोत्री से उत्तरकाशी तक घोषित ईको सेंसिटिव जोन से विकास कार्य प्रभावित होने की समस्या उनके सम्मुख रखीं।
इस पर केंद्रीय मंत्री ने ईको सेंसिटिव जोन में संशोधन कर इसमें स्थानीय लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए मॉडल के रूप में लागू करने की बात कही। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को गंगोत्री धाम में जनरेटरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाकर ऊर्जा के ईको फ्रेंडली विकल्प तलाशने को कहा।
इसके बाद उमा भारती गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। यहां गंगोत्री मंदिर एवं घाट पर पूजा-अर्चना कर गंगा को गंगोत्री से गंगा सागर तक निर्मल बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि सरकार गंगा संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। गंगा सफाई में धन की कोई कमी नहीं है।
ईको सेंसिटिव जोन से लोगों को दिक्कत
किसी संरक्षित क्षेत्र या पर्यावरण, जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र के संरक्षण के लिए 1986 के पर्यावरण नियमों के अधीन किसी भी क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन या पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र कहा जाता है।
2002 में केंद्र ने संरक्षित क्षेत्र के दस किलोमीटर के दायरे को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का फैसला किया था। बाद में यह तय किया गया कि क्षेत्र और वहां की स्थानीय गतिविधियों के लिहाज से ईको सेंसिटिव जोन घोषित किए जाएंगे।
उत्तराखंड में स्थानीय लोगों को इस बात का अंदेशा है कि ईको सेंसिटिव जोन उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में बाधक बनेगा। क्योंकि वे चारापत्ती, जलौनी और दूसरी चीजों के लिए अपने आसपास के वनों पर निर्भर हैं। उमा भारती का यह बयान स्थानीय निवासियों को राहत देगा।