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चारधाम यात्रा में लग गई इमरजेंसी तो नहीं मिलेगा टॉयलेट
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 22 Aug 2017 04:53 PM IST
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सोचिए, आप चारधाम यात्रा पर है और आपको इमरजेंसी लग गई तो भूल जाइए टायलेट। आपको टेंपररी व्यवस्थाओं के साथ जंगल का कोई कोना ढूंढना पड़ेगा।
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जी हां, केदारनाथ, बदरीनाथ जैसे धाम जहां हर दिन हजारों की संख्या में यात्री पहुंचते है वहां टायलेट नहीं होने से यात्री खुले में शौच करते है। फिल्म टायलेट में शौचालय की अहमियत को बताई गई। घर में शौचालय बनवाना ही ताजमहल बनाने के बराबर है। स्वच्छ भारत अभियान पर शौचालय की कमी भारी पड़ रही है।
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स्वच्छ भारत अभियान और नमामि गंगे योजना पर चारधाम यात्रा भारी पड़ रही है। यात्रा राजमार्गो व संपर्क मार्गो के साथ बाजारों व पड़ावों पर शासन-प्रशासन द्वारा शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यात्री खुले में शौच को मजबूर हैं। इस समस्या से जहां स्थानीय पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। वहीं केदारघाटी में गंदगी बढ़ रही है। बावजूद व्यवस्था सुधार के प्रयास नहीं हो रहे हैं।
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यात्री खुले में शौच को मजबूर
3 मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक 76 किमी हाईवे पर तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सिर्फ तीन शौचालय है, जो सुलभ के अधीन हैं। इसके अलावा यात्रा तैयारियों के नाम पर जिला पंचायत द्वारा कुछ स्थानों पर अस्थाई शौचालय बनाए गए हैं जो खानापूर्ति साबित हो रहे हैं। इन शौचालयों में एक समय में तीन से सात लोग ही जा सकते हैं। लेकिन पानी के अभाव में जिस तरह से यहां गंदगी पसरी पड़ी है, उससे इनका उपयोग करना संभव नहीं है। सोनप्रयाग में भी स्थिति बदहाल है।
यहां भी शौचालय की व्यवस्था महज खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में यात्री खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी बुर्जुग और महिलाओं को लेकर बनी हुई है। हैरत यह है कि अब भी प्रशासन व विभागीय अधिकारी समस्या निस्तारण के बजाय आश्वासन देकर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
कोलकाता से आई रमा देवी, प्रेमा गांगुली, श्यामा ताई, धनुवीर प्रकाश, महेंद्र प्रताप, गुजरात के राजा भाई, केशव राम पटेल ने बताया कि बीते 15 मई से चारधाम यात्रा पर आए हुए हैं। लेकिन गंगोत्री, यमनोत्री से लेकर यहां तक शौचालय/बाथरूम की समस्या मुंह बाए खड़ी है। नहाने-धोने के लिए सड़क किनारे प्राकृतिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा तैयारियों का जो प्रचार-प्रसार किया, वह धरातल में कहीं नहीं दिख रहा है। स्थिति यह है कि हाईवे पर जरूरी इंतजाम नहीं होने के कारण यात्री अपने वाहनों से हाईवे से लगे या बाजारों से निकट के संपर्क मार्गो पर शौच के लिए जा रहे हैं।
50 कॉटेज और बाथरूम एक
शौचालय
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
केदारनाथ में एमआई-26 हेलीपैड पर बनाए गए 50 कॉटेज पर सिर्फ 10 बाथरूम बनाए गए हैं। जबकि एक कॉटेज में 5 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि धाम में शौचालय/बाथरूम की क्या सुविधा है। केदारनाथ धाम में प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री रुक रहे हैं। लेकिन उन्हें शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
पैदल मार्ग पर गिनती के शौचालय
करीब 17 किमी लंबे गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर डीडीएम को 100 बायोडायजेस्ट शौचालय बनाए जाने थे। यहां पर डीडीएम ने शौचालय तो बना दिए हैं। लेकिन इनमें जरूरी इंतजाम नहीं हैं। गौरीकुंड में भी मात्र 8 बायोडायजेस्ट शौचालय के भरोसे यात्रा को छोड़ा गया है, जो खानापूर्ति साबित हो रहे हैं। यहां मंदाकिनी नदी किनारे गंदगी पसरी पड़ी है।
मॉडन टायलेट योजना हुई हवाई साबित
रुद्रप्रयाग जनपद में पांच वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग द्वारा मॉडन टायलेट योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव के तहत बदरीनाथ हाईवे पर खांकरा, नरकोटा व रुद्रप्रयाग तथा गौरीकुंड हाईवे पर तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, नारायणकोटी सहित 10 से अधिक जगहों पर सुविधाजनक बाथरूम/टायलेट बनने थे। लेकिन आज तक इस दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई है।
शौचालय की व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिली हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है। सुलभ को 50 टायलेट बनाने के लिए कह दिया गया है। बाजारों, पड़ाव व केदारनाथ में साफ-सफाई को लेकर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
-- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
पैदल मार्ग पर गिनती के शौचालय
करीब 17 किमी लंबे गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर डीडीएम को 100 बायोडायजेस्ट शौचालय बनाए जाने थे। यहां पर डीडीएम ने शौचालय तो बना दिए हैं। लेकिन इनमें जरूरी इंतजाम नहीं हैं। गौरीकुंड में भी मात्र 8 बायोडायजेस्ट शौचालय के भरोसे यात्रा को छोड़ा गया है, जो खानापूर्ति साबित हो रहे हैं। यहां मंदाकिनी नदी किनारे गंदगी पसरी पड़ी है।
मॉडन टायलेट योजना हुई हवाई साबित
रुद्रप्रयाग जनपद में पांच वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग द्वारा मॉडन टायलेट योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव के तहत बदरीनाथ हाईवे पर खांकरा, नरकोटा व रुद्रप्रयाग तथा गौरीकुंड हाईवे पर तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, नारायणकोटी सहित 10 से अधिक जगहों पर सुविधाजनक बाथरूम/टायलेट बनने थे। लेकिन आज तक इस दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई है।
शौचालय की व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिली हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है। सुलभ को 50 टायलेट बनाने के लिए कह दिया गया है। बाजारों, पड़ाव व केदारनाथ में साफ-सफाई को लेकर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
-- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग