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विधानसभा से गुम हो गई रुद्रप्रयाग की आवाज

Tue, 17 May 2016 02:58 AM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 17 May 2016 02:58 AM IST
सार

  • अब सदन में रुद्रप्रयाग की बात कहने वाला कोई नहीं
  • हरक, शैला की सदस्यता खत्म हुई तो जनप्रतिनिधि विहिन हो गया रुद्रप्रयाग
  • हालांकि अभी इस मामले में 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में है सुनवाई

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no representative in assembly from rudraprayag.
हरक स‌िंह रावत के साथ शैला रानी - फोटो : AmarUjala

विस्तार

पिछले दिनों सूबे के सियासी संकट का नुकसान सबसे ज्यादा जनपद रुद्रप्रयाग को झेलना पड़ा है। आज नौबत यह आ गई है कि इस जिले का विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं बचा। जिले में विधानसभा की दो सीटें हैं, और दोनों के विधायकों हरक सिंह रावत व शैला रानी रावत की सदस्यता निरस्त हो चुकी है।

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शासन ने सदस्यता खोने वाले विधायकों की निधि भी रोक दी है। ऐसे में इस जिले के विकास व अन्य समस्याओं के समाधान की वकालत करने वाला कोई विधायक नहीं रहा है।
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जिले की दो सीटों में रुद्रप्रयाग से हरक सिंह रावत और केदारनाथ से शैलारानी रावत विधायक निर्वाचित हुई थीं। हाल के दिनों में कांग्रेस पार्टी से बगावत कर भाजपा के पाले में जाने वाले नौ विधायकों में ये दोनों भी शामिल हैं। हरक सिंह रावत तो इस विद्रोह का सीधे नेतृत्व कर रहे थे। इसके बाद ही सरकार अल्पमत में आई थी।

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राज्य के इतिहास में पहली बार जिले से कोई विधायक नहीं

no representative in assembly from rudraprayag.
हरक सिंह रावत - फोटो : ANI

बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हुए फ्लोर टेस्ट में हरीश रावत सरकार तो बच गई, लेकिन बागियों की सदस्यता भी समाप्त हो गई। यही नहीं, बागियों की विधायक निधि पर भी रोक लगा दी गई। इस तरह रुद्रप्रयाग की दोनों विधानसभा सीटें जनप्रतिनिधि विहीन हो र्गईं।

गौरतलब है कि यह चुनावी वर्ष है, जिसमें विकास के तमाम कार्य सभी जनपदों में होने हैं। मगर अब स्थिति यह है कि विधानसभा में रुद्रप्रयाग की समस्याओं को लेकर कोई सवाल उठाने वाला बचा है, न ही यहां विकास के लिए विधायक निधि।

कुल मिलाकर राज्य के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी जनपद में एक भी विधायक ना रहा हो। दोनों विधायकों की निधि पर रोक के बाद जिले में विकास के तमाम प्रस्ताव लटकने का अंदेशा है।

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