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इलाज के लिए छह घंटे भटकता रहा 'खुश'
अमर उजाला, त्यूनी
Updated Tue, 31 Dec 2013 10:33 PM IST
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सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं भी ‘सरकारी’ हैं। सरकार और उसके नुमाइंदे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के चाहे जितने भी दावे कर लें हकीकत में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की जनता आज भी प्राथमिक उपचार तक के लिए जूझ रही है।
14 गांव हैं निर्भर
करीब 14 गांवों की आबादी से जुड़े सरकारी अस्पताल भटाड़ में ताले लटके होने के चलते सोमवार को तेज बुखार और उल्टी-दस्त से पीड़ित एक मासूम की जिंदगी पर बन आई।
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परिजन बच्चे को गोद में लिए उपचार के लिए भटकते रहे। मासूम को इलाज दिलाने के लिए परिजनों को 45 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूनी की दौड़ लगानी पड़ी। करीब छह घंटे जूझने के बाद मासूम को उपचार मिल सका तब जाकर परिजनों ने राहत की सांस ली।
अस्पताल में लगा है ताला
सोमवार दोपहर बाद डेरनाड़ निवासी देवेंद्र क्षेत्री के पांच माह के शिशु खुश की तेज बुखार और उल्टी-दस्त से हालत बिगड़ गई। परिजन खुश को लेकर सरकारी अस्पताल भटाड़ पहुंचे लेकिन यहां पर ताले लटके मिले।
पढ़ें, बेटे का मुंह देख दान कर दी बेटी की आंखें
यहां पता चला कि अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट छुट्टी पर है और डाक्टर ने ज्वाइनिंग नहीं दी है। जबकि डाक्टर को 10 दिन पूर्व ही तैनाती दी गई है।
कोई नहीं रहता अस्पताल में
डाक्टर और फार्मासिस्ट दोनों के नहीं होने से अस्पताल 15 दिन से बंद पड़ा है। ऐसे में उन्हें यूटिलिटी बुक करके बच्चे को 45 किलोमीटर दूर प्राथमिक अस्पताल त्यूनी ले जाना पड़ा।
पढ़ें, शादी का झांसा दे फौजी ने लूट ली युवती की इज्जत
सीएमओ डा. गुरपाल सिंह ने कहा कि दस दिन पूर्व ही अस्पताल के लिए ऋषिकेश से डाक्टर भेजा गया है। यदि अभी तक ज्वाइनिंग नहीं दी है तो डाक्टर का वेतन काटा जाएगा। उसे चेतावनी भी जारी की जाएगी।
फार्मासिस्ट के भरोसे पीएचसी
भले ही देवेंद्र क्षेत्री के पांच माह के शिशु खुश को कई घंटे उपरांत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार मिल गया, लेकिन पीएचसी त्यूनी में भी स्वास्थ्य सेवाएं महज फार्मासिस्ट के भरोसे हैं। यहां तैनात डाक्टर का दस दिन पूर्व अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया है।
महिला चिकित्सक कई साल से नहीं है। ऐसे में गंभीर रोगियों को सीधे विकासनगर ले जाना पड़ रहा है। अस्पताल से 180 गांवों की आबादी जुड़ी हुई है।
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14 गांव हैं निर्भर
करीब 14 गांवों की आबादी से जुड़े सरकारी अस्पताल भटाड़ में ताले लटके होने के चलते सोमवार को तेज बुखार और उल्टी-दस्त से पीड़ित एक मासूम की जिंदगी पर बन आई।
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परिजन बच्चे को गोद में लिए उपचार के लिए भटकते रहे। मासूम को इलाज दिलाने के लिए परिजनों को 45 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूनी की दौड़ लगानी पड़ी। करीब छह घंटे जूझने के बाद मासूम को उपचार मिल सका तब जाकर परिजनों ने राहत की सांस ली।
अस्पताल में लगा है ताला
सोमवार दोपहर बाद डेरनाड़ निवासी देवेंद्र क्षेत्री के पांच माह के शिशु खुश की तेज बुखार और उल्टी-दस्त से हालत बिगड़ गई। परिजन खुश को लेकर सरकारी अस्पताल भटाड़ पहुंचे लेकिन यहां पर ताले लटके मिले।
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यहां पता चला कि अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट छुट्टी पर है और डाक्टर ने ज्वाइनिंग नहीं दी है। जबकि डाक्टर को 10 दिन पूर्व ही तैनाती दी गई है।
कोई नहीं रहता अस्पताल में
डाक्टर और फार्मासिस्ट दोनों के नहीं होने से अस्पताल 15 दिन से बंद पड़ा है। ऐसे में उन्हें यूटिलिटी बुक करके बच्चे को 45 किलोमीटर दूर प्राथमिक अस्पताल त्यूनी ले जाना पड़ा।
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सीएमओ डा. गुरपाल सिंह ने कहा कि दस दिन पूर्व ही अस्पताल के लिए ऋषिकेश से डाक्टर भेजा गया है। यदि अभी तक ज्वाइनिंग नहीं दी है तो डाक्टर का वेतन काटा जाएगा। उसे चेतावनी भी जारी की जाएगी।
फार्मासिस्ट के भरोसे पीएचसी
भले ही देवेंद्र क्षेत्री के पांच माह के शिशु खुश को कई घंटे उपरांत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार मिल गया, लेकिन पीएचसी त्यूनी में भी स्वास्थ्य सेवाएं महज फार्मासिस्ट के भरोसे हैं। यहां तैनात डाक्टर का दस दिन पूर्व अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया है।
महिला चिकित्सक कई साल से नहीं है। ऐसे में गंभीर रोगियों को सीधे विकासनगर ले जाना पड़ रहा है। अस्पताल से 180 गांवों की आबादी जुड़ी हुई है।