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Dehradun News: भ्रूण के डीएनए मिलान में नहीं हुई पुष्टि, आरोपी को जमानत
Fri, 16 Oct 2026 06:24 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Fri, 16 Oct 2026 06:24 PM IST
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- न्यायालय ने मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट को माना अहम आधार
- 50 हजार रुपये की जमानत राशि पर रिहाई के आदेश
टैग...अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। अपर जिला जज एवं विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) अब्दुल कय्यूम की अदालत ने सेलाकुई थाना क्षेत्र के एक मामले में उत्तर प्रदेश के थाना पीलीभीत के पूरणपुर आरोपी आतिफ (वर्तमान पता सेलाकुई, शंकरपुर) को जमानत दे दी। न्यायालय ने भ्रूण और आरोपी के रक्त के नमूनों के डीएनए परीक्षण में मिलान नहीं होने, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को जमानत का आधार माना।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी 26 सितंबर 2025 से जेल में बंद था। मामले में पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि प्राथमिकी लिखवाने से तीन माह पहले आरोपी ने पीड़िता के साथ मारपीट की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता की उम्र 19 वर्ष है और उसे फंसाने के लिए झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई है। मेडिकल रिपोर्ट में गर्भावस्था की अवधि चार माह एक दिन बताई गई, जबकि घटना तीन माह पहले की बताई गई थी। फॉरेंसिक जांच में भ्रूण के रक्त का आरोपी से मिलान नहीं हुआ। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को 50 हजार रुपये की दो जमानतियों और समान राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी को पीड़िता और उसके परिजनों से संपर्क नहीं करने तथा साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करने की शर्त भी रखी गई है।
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- 50 हजार रुपये की जमानत राशि पर रिहाई के आदेश
टैग...अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। अपर जिला जज एवं विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) अब्दुल कय्यूम की अदालत ने सेलाकुई थाना क्षेत्र के एक मामले में उत्तर प्रदेश के थाना पीलीभीत के पूरणपुर आरोपी आतिफ (वर्तमान पता सेलाकुई, शंकरपुर) को जमानत दे दी। न्यायालय ने भ्रूण और आरोपी के रक्त के नमूनों के डीएनए परीक्षण में मिलान नहीं होने, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को जमानत का आधार माना।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी 26 सितंबर 2025 से जेल में बंद था। मामले में पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि प्राथमिकी लिखवाने से तीन माह पहले आरोपी ने पीड़िता के साथ मारपीट की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता की उम्र 19 वर्ष है और उसे फंसाने के लिए झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई है। मेडिकल रिपोर्ट में गर्भावस्था की अवधि चार माह एक दिन बताई गई, जबकि घटना तीन माह पहले की बताई गई थी। फॉरेंसिक जांच में भ्रूण के रक्त का आरोपी से मिलान नहीं हुआ। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को 50 हजार रुपये की दो जमानतियों और समान राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी को पीड़िता और उसके परिजनों से संपर्क नहीं करने तथा साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करने की शर्त भी रखी गई है।
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