CM का ऐलान, उत्तराखंड में बैन नहीं होगी शराब
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उत्तराखंड में चारों ओर शराबबंदी का शोर है। महिलाएं और बच्चे शराब की दुकानों में लगातार तोड़फोड़ कर रहे हैं। लेकिन शराब बंदी की चाह रखने वालों के लिए एक बुरी खबर है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि बिहार की तरह राज्य में लिकर बैन करने की उनकी कोई योजना नहीं है। लेकिन वह शराब को आय का स्रोत नहीं बनने देंगे।
त्रिवेंद्र सिंह रावत का मानना है कि हर मौसम लायक रोड नेटवर्क और केंद्र सरकार की रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम, उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी और टूरिज्म को प्रोत्साहन देगी।
चारधाम के साथ-साथ ऑल वेदर रोड नेटवर्क प्रॉजेक्ट
एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वह प्रधानमंत्री के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों से मिले। वे राज्य को डिवेलप करने में अपना योगदान देना चाहते हैं।
उत्तराखंड को पहले ही तीन बड़े प्रॉजेक्ट- चारधाम के साथ-साथ ऑल वेदर रोड नेटवर्क प्रॉजेक्ट, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रॉजेक्ट और जॉली ग्रांट में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट- मिल चुके हैं। रेल प्रॉजेक्ट के लिए लैंड ऐक्विजिशन अंतिम चरण में है।
उन्होंने कहा कि शराब बंदी कर बिहार के रास्ते पर हम नहीं जा सकते हैं। हमें इस मुद्दे के व्यावहारिक पहलू के बारे में विचार करना चाहिए। केवल कानून बनाने से कोई चीज नहीं रुक सकती है। जहां तक हमारी एक्साइज पॉलिसी का सवाल है तो हम लिकर को प्रमोट नहीं करना चाहते हैं। हम इसे रेवेन्यू का स्रोत नहीं बनाना चाहते हैं।
ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) पर रिवाइज्ड मास्टर प्लान
रावत ने कहा कि हाल में उत्तरकाशी में ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) पर रिवाइज्ड मास्टर प्लान के मुद्दे को नई दिल्ली में नीति आयोग के सामने उठाया था।
नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने उत्तराखंड के लिए अलग नॉर्म्स बनाए हैं। उदाहरण के लिए उनका कहना है कि क्रॉस रोड स्लोप 20 डिग्री होना चाहिए।
वहीं, इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) गाइडलाइंस के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में यह 60 डिग्री तक हो सकता है। आईआरसी रोड के मामले में एक्सपर्ट है। ईएसजेड नोटिफिकेशन में यह प्रावधान हमारे लिए समस्या पैदा कर सकता है।
पहाड़ी राज्यों के लिए उपयोगी
रावत ने कहा कि उत्तरकाशी से आगे के इलाके को रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है, उस पर ऑल वेदर रोड नेटवर्क प्रॉजेक्ट का असर पड़ सकता है।
नीति आयोग की मीटिंग में मैंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का नाम बदलने की सलाह दी थी। मेरी राय में, यह प्रधानमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना होना चाहिए।
यह ज्यादातर नॉर्म्स बदल सकता है। हम रोपवे के जरिए गांव कनेक्ट करने में इसका इस्तेमाल करने की स्थिति में हो सकते हैं। पहाड़ी इलाकों में छोटे गांव होते हैं। इससे जंगलों की कटाई से भी बचा जा सकता है। यह योजना सभी पहाड़ी राज्यों के लिए उपयोगी होगी।