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उत्तराखंडः जमीन नहीं मिली तो लटका केंद्रीय संस्थान
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 20 Sep 2015 01:08 PM IST
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उत्तराखंड में उपयुक्त जमीन नहीं मिलने के चलते महिलाओं की रोजगारपरक ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित केंद्रीय संस्थान लटक गया है।
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रिजनल वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन (आरवीटीआई) खोले जाने के लिए केंद्र ने प्रदेश सरकार से देहरादून शहर में सात एकड़ जमीन मांगी थी। प्रदेश सरकार की ओर से शहर से दूर दिखाई गई जमीनों को केंद्र की टीम ने रिजेक्ट कर दिया। यह संस्थान खुल जाता तो प्रदेश की एक हजार महिलाओं को हर वर्ष रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलता।
केंद्र सरकार की ओर से पंजाब, त्रिपुरा, गोवा, बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और उत्तराखंड में एक-एक आरवीटीआई खोले जाने थे। 14 मार्च, 2014 को केंद्रीय रोजगार प्रशिक्षण मंत्रालय की ओर से उत्तराखंड शासन को राज्य में संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव भेजा गया था और करीब सात एकड़ भूमि को चिह्नित करने की मांग की गई थी।
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इसके बाद प्रशिक्षण निदेशालय उत्तराखंड के निदेशक की ओर से 20 मई, 2014 को केंद्र को पत्र भेजा गया। उन्होंने आईटीआई निरंजनपुर देहरादून और आईटीआई गुजराड़ा देहरादून परिसर में भूमि उपलब्ध होने की बात कही। करीब एक माह बाद केंद्रीय रोजगार प्रशिक्षण मंत्रालय की टीम ने भूमि का निरीक्षण किया। लेकिन भूमि जरूरत के लिहाज से कम मिली।
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राज्य की ओर से छरबा और सहारनपुर रोड पर भी कुछ जमीनें दिखाई गई, जिन्हें केंद्र की टीम ने लोकेशन के लिहाज से रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद से पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। केंद्र की ओर से उसके बाद अभी तक राज्य से कोई संपर्क नहीं साधा गया।
महिलाओं को मिलती हर तरह की सुविधा
इस संस्थान में महिलाओं को ट्रेनिंग से जुड़ी हर तरह की सुविधा मिलती। यहां पर माडर्न क्लास रूम, वर्कशॉप और हॉस्टल की सुविधाएं विकसित की जानी थी। इसमें महिलाओं की काउंसिलिंग, गाइडेंस और प्लेसमेंट प्रदान करने के लिए सभी व्यवस्थाएं की जानी थी।
जमीन न मिलने से पहले हाथ से फिसले ये संस्थान
जमीन का नहीं मिलना पहले भी केंद्रीय संस्थानों के खुलने की राह में रोड़ा बनता रहा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत जब केंद्र सरकार में मंत्री थे तो हरिद्वार के लिए एनडीआरएफ की बटालियन स्वीकृत कराकर लाए थे लेकिन इसके लिए सालों तक जमीन नहीं मिली।
बाद में जो जमीन दी गई, उस पर पहले से ही केंद्र की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना स्वीकृत है। लिहाजा मामला कोर्ट में चला गया। हरीश रावत के केंद्रीय मंत्री रहते ही हरिद्वार में मंगलौर के पास हरजौली जट में केंद्रीय पुष्प अनुसंधान संस्थान की स्थापना बात चली थी। केंद्र की टीम की ओर से यहां पर निरीक्षण भी किया गया लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हरिद्वार में ही गन्ना अनुसंधान संस्थान के लिए लंबे समय से जमीन की तलाश होती रही।
केंद्रीय टीम की ओर से देहरादून में सात एकड़ जमीन मांगी जा रही थी। निरंजनपुर में जमीन दिखाई गई लेकिन वह कम पड़ गई। शहर के अंदर इतनी जमीन मिलना मुश्किल है। टीम को छरबा और सहारनपुर रोड पर जमीनें दिखाई गई, जो उन्हें पसंद नहीं आई। उनके लिहाज से उपयुक्त जमीन नहीं मिली। उसके बाद उन्होंने कोई संपर्क भी नहीं किया।
- एके त्रिपाठी, राज्य समन्वयक, प्रस्तावित आरवीटीआई